नई दिल्ली, दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित गोल्फ टूर्नामेंट्स में शामिल द मास्टर्स अपनी परंपराओं और खास नियमों के लिए जाना जाता है। 1934 में शुरू हुआ यह टूर्नामेंट हर साल ऑगस्टा नेशनल गोल्फ क्लब में आयोजित होता है और गोल्फ प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण बना रहता है।
गोल्फ की दुनिया में ‘द मास्टर्स’ का स्थान चारों मेजर टूर्नामेंट में सबसे ऊपर माना जाता है। इस साल प्रतिष्ठित मेजर चैम्पियनशिप का 90वां संस्करण खेला जा रहा है। ऑगस्टा नेशनल गोल्फ क्लब के हरे-भरे और शानदार मैदानों पर यह केवल एक टूर्नामेंट नहीं है, बल्कि परंपराओं और इतिहास का महाकुंभ है।
मास्टर्स टूर्नामेंट की स्थापना वर्ष 1934 में गोल्फ के दिग्गज एमेच्योर चैम्पियन बॉबी जोन्स और निवेश बैंकर क्लिफर्ड रॉबर्ट्स ने की थी। मैदान के इतिहास (एक पूर्व नर्सरी) का सम्मान करते हुए, कोर्स के हर होल का नाम किसी न किसी पेड़ या झाड़ी के नाम पर रखा गया है।
मास्टर्स की सबसे बड़ी पहचान ‘ग्रीन जैकेट’ की शुरुआत 1937 में हुई थी। शुरुआत में इसे क्लब के सदस्यों के लिए पेश किया गया था ताकि वे अलग दिख सकें, लेकिन बाद में इसे विजेताओं को दिया जाने लगा।
इस टूर्नामेंट की सबसे खास परंपरा है ग्रीन जैकेट। विजेता खिलाड़ी को हरे रंग की जैकेट पहनाई जाती है, जो जीत और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। यह जैकेट सिर्फ विजेता ही पहन सकता है और इसे क्लब परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होती (कुछ विशेष नियमों के साथ)।
एक और दिलचस्प परंपरा है चैंपियंस डिनर, जहां पिछले साल का विजेता मेन्यू तय करता है और सभी पूर्व चैंपियंस को आमंत्रित करता है। यह परंपरा खिलाड़ियों के बीच सम्मान और भाईचारे को दर्शाती है।
टूर्नामेंट में दर्शकों को “फैंस” नहीं बल्कि “पैट्रन्स” कहा जाता है, जो इसकी खास पहचान है। इसके अलावा, यहां मोबाइल फोन के उपयोग पर कड़ी पाबंदी होती है, ताकि खेल का माहौल शांत और केंद्रित बना रहे।
द मास्टर्स की एक और खास बात यह है कि इसमें खेलने के लिए खिलाड़ियों को निमंत्रण (Invitation) मिलता है, यानी हर कोई इसमें हिस्सा नहीं ले सकता। यही वजह है कि यह टूर्नामेंट गोल्फ की दुनिया में बेहद खास और प्रतिष्ठित माना जाता है।
इन अनोखी परंपराओं और सख्त नियमों के कारण ‘द मास्टर्स’ सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक विरासत और परंपरा का प्रतीक बन चुका है।















