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नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन जब बात घरेलू क्रिकेट यानी रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी या अन्य घरेलू टूर्नामेंट की आती है, तो इनमें से अधिकांश बड़े नाम नज़र नहीं आते। यह सवाल क्रिकेट प्रेमियों के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है कि आखिर क्यों टीम इंडिया के खिलाड़ी डोमेस्टिक क्रिकेट में नियमित रूप से भाग नहीं लेते।

अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल की व्यस्तता

भारतीय टीम का कैलेंडर बेहद व्यस्त रहता है। खिलाड़ी लगभग सालभर टेस्ट, वनडे, टी-20 और आईसीसी टूर्नामेंट्स में व्यस्त रहते हैं। इसके अलावा आईपीएल भी उनके कार्यक्रम का अहम हिस्सा बन गया है। ऐसे में खिलाड़ियों को घरेलू टूर्नामेंट्स में खेलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।

फिटनेस और इंजरी मैनेजमेंट

आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस सबसे बड़ी प्राथमिकता है। खिलाड़ी लगातार मैच खेलते हैं, जिससे चोट का खतरा बढ़ जाता है। टीम प्रबंधन और फिजियो स्टाफ उन्हें आराम देने की सलाह देते हैं ताकि वे बड़े टूर्नामेंट के लिए फिट रह सकें। इस कारण से खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट को अक्सर मिस करते हैं।

प्राथमिकता में बदलाव

पहले के दौर में डोमेस्टिक क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का सबसे अहम रास्ता माना जाता था। लेकिन आज आईपीएल जैसे मंच खिलाड़ियों को सीधा पहचान और अवसर दिला देते हैं। यही वजह है कि कई खिलाड़ी रणजी या दलीप ट्रॉफी की बजाय आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

आर्थिक कारण और ब्रांड वैल्यू

अंतरराष्ट्रीय मैच और आईपीएल से खिलाड़ियों को मोटी कमाई होती है। वहीं घरेलू क्रिकेट में आर्थिक प्रोत्साहन अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए घरेलू टूर्नामेंट में समय और ऊर्जा खर्च करना प्राथमिकता नहीं रह जाता।

बोर्ड और चयनकर्ताओं की नीति

बीसीसीआई और चयनकर्ताओं की नजर भी अब ज्यादातर आईपीएल और भारत-ए जैसे टूर्नामेंट्स पर रहती है। जब डोमेस्टिक क्रिकेट को चयन का मुख्य आधार ही नहीं बनाया जाता, तो खिलाड़ी भी उसकी ओर आकर्षित नहीं होते।

डोमेस्टिक क्रिकेट के स्तर पर यह कमी साफ दिखती है। कई युवा खिलाड़ियों को बड़े स्टार्स के खिलाफ खेलने का अनुभव नहीं मिल पाता, जिससे उनका आत्मविश्वास और क्रिकेटिंग स्किल प्रभावित होती है।

समाधान क्या हो सकता है?

  • अनिवार्य नियम: बीसीसीआई चाहे तो हर खिलाड़ी के लिए न्यूनतम घरेलू मैच खेलना अनिवार्य कर सकती है।

  • वित्तीय प्रोत्साहन: डोमेस्टिक क्रिकेट में खिलाड़ियों की कमाई बढ़ाई जाए ताकि स्टार क्रिकेटर्स भी आकर्षित हों।

  • शेड्यूल मैनेजमेंट: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मैचों का टकराव कम किया जाए।

अगर भारतीय क्रिकेट को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाना है, तो स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी घरेलू क्रिकेट में जरूरी है। इससे न केवल नए खिलाड़ियों का विकास होगा बल्कि क्रिकेट का आधार भी और मजबूत बनेगा।