नई दिल्ली, गुरिंदरवीर सिंह ने खुलासा किया है कि बचपन में पिता से उसैन बोल्ट के किस्से सुनकर उनके भीतर धावक बनने का सपना जागा। दुनिया के महानतम स्प्रिंटर्स में शामिल उसेन बोल्ट की कहानियों और उपलब्धियों ने गुरिंदरवीर को एथलेटिक्स की ओर प्रेरित किया।
साल 2008 में मशहूर धावक उसैन बोल्ट ने ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। तब 7 साल के गुरिंदरवीर सिंह TV पर यह देख रहे थे।
बोल्ट को रिकॉर्ड बनाते देख वे प्रेरित हुए और तभी ठान लिया कि एक दिन भारत के सबसे तेज धावक बनकर देश का नाम रोशन करेंगे। कांस्टेबल पिता कमलजीत उन्हें अक्सर बोल्ट के किस्से सुनाते थे।
गुरिंदरवीर ने बताया कि उनके पिता अक्सर उन्हें बोल्ट की रफ्तार, संघर्ष और रिकॉर्ड्स के बारे में बताते थे। इन्हीं कहानियों को सुनते-सुनते उनके मन में भी ट्रैक पर कुछ बड़ा करने की इच्छा पैदा हुई। उन्होंने कहा कि बोल्ट की आत्मविश्वास भरी शैली और जीतने का जज्बा उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा।
आज गुरिंदरवीर भारतीय एथलेटिक्स में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उनकी तेज रफ्तार और लगातार बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें देश के उभरते स्प्रिंटर्स में शामिल कर दिया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह इसी तरह मेहनत करते रहे, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
उसेन बोल्ट को दुनिया भर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा माना जाता है। ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में उनके रिकॉर्ड आज भी एथलेटिक्स इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। गुरिंदरवीर जैसे कई युवा खिलाड़ी बोल्ट को अपना आदर्श मानते हुए खेल में आगे बढ़ रहे हैं।
गुरिंदरवीर की कहानी यह दिखाती है कि प्रेरणा और सही मार्गदर्शन किसी भी युवा खिलाड़ी के सपनों को नई दिशा दे सकता है। अब भारतीय खेल प्रेमियों को उनसे भविष्य में और बड़े प्रदर्शन की उम्मीद है।

















