नई दिल्ली, भारतीय बैडमिंटन के उभरते सितारे आयुष शेट्टी ने एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर के लिए बड़ी है, बल्कि भारतीय बैडमिंटन के लिए भी गर्व का क्षण है।
भारतीय शटलर आयुष शेट्टी को बैडमिंटन एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। फाइनल मुकाबले में उन्हें चीन के शी यू की के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।
60 सालों के बाद किसी भारतीय ने चैंपियनशिप के मेंस सिंगल्स कैटेगरी के फाइनल में जगह बनाई थी। आयुष से पहले दिनेश खन्ना ने 1965 में मेंस सिंगल्स में गोल्ड जीता था।
रविवार को चीन के झेजियांग में खेले गए फाइनल में आयुष का मुकाबला दुनिया के नंबर-2 खिलाड़ी शी यू की से था। 20 साल के आयुष यह मैच 8-21, 10-21 से सीधे गेम में हार गए।
आयुष शेट्टी ने पूरे टूर्नामेंट में जबरदस्त खेल दिखाया और कई मजबूत खिलाड़ियों को हराते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि फाइनल मुकाबले में उन्हें कड़ी टक्कर मिली, लेकिन उनके जुझारूपन और कौशल ने सभी का दिल जीत लिया।
उनकी इस सफलता से यह साफ हो गया है कि भारत के पास बैडमिंटन में नई प्रतिभाओं की कमी नहीं है। आयुष की यह उपलब्धि आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयुष शेट्टी इसी तरह मेहनत और निरंतरता बनाए रखते हैं, तो भविष्य में वे गोल्ड मेडल भी जीत सकते हैं और भारत का नाम और ऊंचा कर सकते हैं।















