नई दिल्ली , भारतीय ओपनर यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा के डोप टेस्ट मिस करने की खबर सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों खिलाड़ी निर्धारित समय पर डोपिंग जांच प्रक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं हो पाए, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
यशस्वी-शेफाली नाडा के ‘रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल’ (RTP) का हिस्सा हैं। नियम के मुताबिक इस पूल में शामिल खिलाड़ियों को हर दिन एक निश्चित समय और स्थान की जानकारी साझा करनी होती है, ताकि उनका औचक परीक्षण किया जा सके।
इन दोनों खिलाड़ियों ने टेस्ट मिस होने का कोई ठोस कारण नहीं बताया, जिसके बाद नाडा ने BCCI और ICC को इस बारे में सूचित कर दिया है। BCCI के एक सूत्र ने इसकी पुष्टि की है। उसने कहा-बोर्ड खिलाड़ियों से इस चूक की वजह पूछेगा।
खेल नियमों के तहत खिलाड़ियों को एंटी-डोपिंग एजेंसियों द्वारा तय किए गए समय और स्थान पर मौजूद रहना होता है। यदि कोई खिलाड़ी टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं होता, तो इसे “Whereabouts Failure” या टेस्ट मिस करने की श्रेणी में रखा जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक बार टेस्ट मिस होना सीधे तौर पर डोपिंग उल्लंघन नहीं माना जाता।
सूत्रों के अनुसार संबंधित अधिकारियों ने मामले को रिकॉर्ड में लिया है और आगे की प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की जाएगी। अभी तक किसी प्रतिबंध या अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। खेल प्रशासन की ओर से मामले की समीक्षा की जा रही है।
National Anti Doping Agency और अंतरराष्ट्रीय एंटी-डोपिंग नियमों के अनुसार खिलाड़ियों को अपने लोकेशन अपडेट और उपलब्धता की जानकारी समय-समय पर देनी होती है। लगातार कई बार टेस्ट मिस होने की स्थिति में खिलाड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक खेलों में एंटी-डोपिंग नियम बेहद सख्त हो चुके हैं और खिलाड़ियों को अपने शेड्यूल तथा उपलब्धता को लेकर काफी सतर्क रहना पड़ता है। ऐसे मामलों का असर खिलाड़ियों की छवि और टीम प्रबंधन की योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल यशस्वी और शेफाली से जुड़े इस मामले पर खेल प्रेमियों और क्रिकेट फैंस की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।















