नई दिल्ली, IPL जैसे हाई-प्रोफाइल टूर्नामेंट में अब खिलाड़ियों की सुरक्षा सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रह गई है। हाल के वर्षों में खिलाड़ियों को हनी ट्रैप, ऑनलाइन फ्रॉड और सट्टेबाजी सिंडिकेट से जोड़ने की कोशिशों ने सुरक्षा एजेंसियों और टीम प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक कई खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को सोशल मीडिया, निजी पार्टियों और संदिग्ध संपर्कों के जरिए फंसाने की कोशिशें सामने आई हैं।
IPL में हनी ट्रैप, खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को लेकर BCCI ने सख्त नियम लागू किए हैं। बोर्ड ने इन खतरों से बचाने के लिए खिलाड़ियों के होटल रूम, बस और डगआउट में बिना अनुमति बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी है। फ्रेंचाइजी मालिकों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
BCCI की एंटी करप्शन एंड सिक्योरिटी यूनिट (ACSU) की रिपोर्ट के मुताबिक कई मैचों के दौरान टीम के डगआउट, होटल और टीम बस में ऐसे लोग देखे गए, जिन्हें वहां रहने की अनुमति नहीं थी। यह प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी गिरोह खिलाड़ियों तक पहुंच बनाने के लिए आकर्षक ऑफर, दोस्ती और निजी संबंधों का इस्तेमाल कर सकते हैं। कई मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पहले संपर्क किया जाता है और फिर धीरे-धीरे व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने या मैच से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं लेने की कोशिश की जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार “हनी ट्रैप” सिर्फ निजी संबंधों तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें ब्लैकमेलिंग, डेटा चोरी और आर्थिक लालच जैसे तत्व भी शामिल हो सकते हैं। खिलाड़ियों की लोकप्रियता और करोड़ों फैंस के बीच उनकी छवि को देखते हुए ऐसे गिरोह उन्हें आसान टारगेट मानते हैं। यही वजह है कि अब आईपीएल फ्रेंचाइज़ियों ने खिलाड़ियों को साइबर सुरक्षा और व्यक्तिगत सतर्कता को लेकर विशेष दिशा-निर्देश देने शुरू कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि कई टीमों ने अपने खिलाड़ियों को अनजान लोगों से दूरी बनाए रखने, निजी जानकारी साझा न करने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी है। होटल, ट्रैवल और निजी आयोजनों के दौरान भी अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीएल केवल क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं बल्कि अरबों रुपये का बड़ा स्पोर्ट्स बिजनेस बन चुका है। ऐसे में मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी गिरोह लगातार खिलाड़ियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। इसी कारण बीसीसीआई और सुरक्षा एजेंसियां खिलाड़ियों की सुरक्षा और टूर्नामेंट की निष्पक्षता को लेकर पहले से अधिक सतर्क दिखाई दे रही हैं।















