नई दिल्ली, क्रिकेट जगत के महान नेता महेंद्र सिंह धोनी ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट टीम की तारीफ करते हुए कहा है कि “भारत की यह टीम सबसे खतरनाक है।” उनके इस बयान ने टीम के अंदर और बाहर दोनों ही जगह सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भर दिया है। धोनी का अनुभव हमेशा से ही खिलाड़ियों के मनोबल और रणनीति पर असर डालता रहा है, और जब वे किसी टीम को “सबसे खतरनाक” बताते हैं, तो इसका मतलब सिर्फ क्षमता तक सीमित नहीं रह जाता — यह टीम की तैयारी, संतुलन और मानसिक मजबूती की भी प्रशंसा होती है।
महेंद्र सिंह धोनी ने टी-20 वर्ल्ड कप से पहले मौजूदा भारतीय टीम की जमकर तारीफ की है, लेकिन साथ ही खिलाड़ियों को बाहरी हालात को लेकर सतर्क रहने की सलाह भी दी है। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान ने साफ कहा कि विराट कोहली और रोहित शर्मा को वर्ल्ड कप खेलना चाहिए, क्योंकि उनके लिए उम्र कभी भी मापदंड नहीं हो सकती।
भारत टी-20 वर्ल्ड कप का डिफेंडिंग चैंपियन है और टूर्नामेंट की शुरुआत 7 फरवरी से होने जा रही है। इस बीच क्रिकेट कमेंटेटर जतिन सप्रू ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इस वीडियो में धोनी एक कार्यक्रम के दौरान कहते नजर आ रहे हैं कि भारतीय टीम इस समय दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में से एक है। उन्होंने कहा, एक मजबूत टीम में जो भी गुण होने चाहिए, वे सभी इस टीम में मौजूद हैं और खासकर इस फॉर्मेट में टीम के पास काफी अनुभव है।
उम्र कोई पैमाना नहीं इवेंट के दौरान जब धोनी से रोहित और विराट की बढ़ती उम्र और 2027 वर्ल्ड कप को लेकर सवाल किया गया तो इस पर धोनी ने कहा, सबसे पहली बात यह है कि कोई भी खिलाड़ी अगले वर्ल्ड कप में क्यों नहीं खेलना चाहेगा। मेरे मुताबिक सिलेक्शन के लिए परफॉर्मेंस और फिटनेस क्राइटेरिया हैं, उम्र नहीं।
उनका यह भी कहना रहा कि दुनिया भर की टीमें अब भारत को स्ट्रॉन्ग कंटेंडर के रूप में लेती हैं, खासकर बड़े टूर्नामेंटों में जहां टेक्निकल तैयारी, रणनीतिक कॉम्बिनेशन और टीम स्पिरिट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। धोनी ने यह भी जोर दिया कि जब टीम में युवा खिलाड़ियों के साथ अनुभवी खिलाड़ियों का मार्गदर्शन मिलता है, तो यह संयोजन विरोधी टीमों के लिए खतरनाक साबित होता है।
धोनी के शब्दों में यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि टीम इंडिया के अंदर विश्वास और सकारात्मकता का प्रतिबिंब भी है। इस तरह के बयान खिलाड़ियों के मनोबल को ऊँचा करते हैं और दर्शकों में भी यह संदेश जाता है कि टीम में सिर्फ क्षमता नहीं, बल्कि विकासशील सोच और मैच-विनिंग मानसिकता है।
भारतीय टीम इस समय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों में प्रतिस्पर्धी रही है। धोनी की बात इस व्यापक परिप्रेक्ष्य को भी रेखांकित करती है कि टीम सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिभाओं पर नहीं, बल्कि ग्रुप स्ट्रेंथ और रणनीति पर खड़ी है — यही चीज़ इसे “सबसे खतरनाक” बनाती है।
















