image resize color correction and ai 2025 12 08t10 1765169402
image resize color correction and ai 2025 12 08t10 1765169402

नई दिल्ली, जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को 1-5 की बड़ी हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम निराशाजनक जरूर है, लेकिन पूरी प्रतियोगिता में टीम ने जिस संघर्ष, फिटनेस और तकनीकी कौशल का परिचय दिया, वह भारतीय जूनियर हॉकी के मजबूत भविष्य की ओर इशारा करता है। सेमीफाइनल में हार मिलने के बावजूद टीम का जज्बा देखने लायक था क्योंकि खिलाड़ी हर मिनट मैच में वापसी की कोशिश करते रहे।

चेन्नई के मेयर आर.आर. स्टेडियम में रविवार को खेले गए मेन्स जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप 2025 के सेमीफाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन जर्मनी ने भारत को 5-1 से हराकर फाइनल में जगह बना ली।

मैच दुनिया की नंबर-1 और नंबर-2 जूनियर टीमों के बीच था, लेकिन खेल में जर्मनी ने शुरुआत से अंत तक बढ़त बनाए रखी। अब भारत 10 दिसंबर को ब्रॉन्ज मेडल के लिए अर्जेंटीना से भिड़ेगा।

जर्मनी ने शुरुआती 13 मिनट बाद बढ़त बनाई मैच की शुरुआत में भारत ने कुछ समय तक मजबूती दिखाई। गोलकीपर प्रिंस दीप सिंह ने शुरुआती मिनटों में तीन अहम सेव किए। 13वें मिनट में जर्मनी को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला। ड्रैग फ्लिक भारतीय खिलाड़ी अंकित पाल से टकराने के बाद अंपायर ने पेनल्टी स्ट्रोक दिया, जिसे लुकास कोसेल ने गोल में बदलकर जर्मनी को 1-0 की बढ़त दिलाई।

सिर्फ 68 सेकंड बाद टाइटस वेक्स का शॉट भारतीय डिफेंडर सुनील पालक्षप्पा के पैर से लगकर गोल में चला गया और स्कोर 2-0 हो गया।

दूसरे और तीसरे क्वार्टर में मैच जर्मनी के पक्ष में झुक गया दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में ही कोसेल ने एक और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर बढ़त 3-0 कर दी। तीसरे क्वार्टर में जोनास वॉन गर्सम और बेन हासबाख ने दो और गोल दागे, जिसके बाद स्कोर 5-0 हो गया।

भारत ने अंतिम क्वार्टर में एक गोल किया चौथे क्वार्टर में लगभग 10 मिनट शेष रहते भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला। अनमोल एक्का ने इसे गोल में बदलते हुए भारत के लिए एकमात्र गोल किया। मुकाबला भारत की 1-5 से हार के साथ समाप्त हुआ।

कोचिंग स्टाफ ने भी माना कि सेमीफाइनल का परिणाम निराशाजनक है, लेकिन खिलाड़ियों के खेल में निरंतर सुधार सकारात्मक संकेत देता है। बेहतर पेनल्टी कॉर्नर कन्वर्जन, तेज पासिंग और निर्णायक पलों में स्थिरता पर काम करने से यह टीम और मजबूत होकर वापसी कर सकती है।

अगला लक्ष्य अब ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला और उससे आगे भारतीय जूनियर हॉकी को विश्व स्तर पर शीर्ष स्थान दिलाना है। यह हार केवल एक सीख है—संघर्ष अभी बाकी है, और इन युवाओं में वह जज्बा भरपूर है जो भविष्य में भारत को हॉकी की वैश्विक शक्ति बना सकता है।