नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पत्नी हसीन जहां को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि लंबे समय से मामला लंबित है और कानूनी प्रक्रिया में बेवजह देरी सहन नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक व्यवस्था का दुरुपयोग कर मामले को खींचने का प्रयास न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामले की पृष्ठभूमि
हसीन जहां ने कुछ साल पहले शमी के खिलाफ घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और अन्य आरोप लगाए थे। मामला विभिन्न अदालतों और कानूनी प्रक्रियाओं से गुजर रहा है।
अदालत का मानना है कि लगातार देरी से न केवल न्याय का समय बढ़ता है, बल्कि सभी पक्षों पर अनावश्यक दबाव भी पड़ता है।
भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहां को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। कोर्ट ने हसीन जहां से कहा- ‘क्या 4 लाख की रकम पर्याप्त नहीं है?’ कलकत्ता हाईकोर्ट ने शमी को 2.5 लाख बेटी और 1.5 लाख पत्नी को गुजारे भत्ते के रूप में देने का आदेश दिया था। इस पर हसीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
हसीन जहां ने 4 लाख रुपए को नाकाफी बताते हुए 10 लाख रुपए हर महीने गुजारा भत्ता देने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की थी। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार और भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को नोटिस भेजकर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट का आदेश, हर महीने ₹4 लाख देंगे इससे पहले, कलकाता हाईकोर्ट ने जुलाई में शमी को हसीन जहां और बेटी आयरा को हर महीने 4 लाख रुपए देने का आदेश दिया था। शमी को ये रुपए महीने के मेंटेनेंस के लिए देने के लिए कहा था। शमी के इस केस की सुनवाई 21 अप्रैल, 2025 को हुई थी, जिस पर 1 जुलाई, 2025 को फैसला आया। यह राशि पिछले सात साल से लागू होगी।
2014 में हुई थी शादी शमी और हसीन जहां की शादी 2014 में हुई थी। 2018 में शमी की पत्नी ने क्रिकेटर और उनके परिवार पर हिंसा करने का आरोप लगाया। शादी के करीब एक साल बाद 17 जुलाई, 2015 को दोनों के एक बेटी ने जन्म लिया। शमी को बेटी आयरा के होने के बाद पता चला कि हसीन जहां पहले से शादी-शुदा थी और उसके पहली शादी से दो बच्चे भी थे।सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और कार्यवाही को निर्धारित समय में पूरा करने को कहा है।
अगर आगे भी देरी हुई तो अदालत सख्त कदम उठा सकती है।
अब मामला तेज़ी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।















