नई दिल्ली, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) विमेंस को लेकर 2024 के सीजन की शुरुआत में सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या यह टीम बड़े मंच पर अपनी पहचान बना पाएगी। पिछले सीजन की नाकामियों और दबाव भरे माहौल के बावजूद RCB विमेंस ने 2024 में जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने इस सवाल का जवाब पूरे आत्मविश्वास के साथ दे दिया। RCB विमेंस ने न सिर्फ 2024 का रुतबा हासिल किया, बल्कि महिला क्रिकेट में अपनी ताकत भी साबित कर दी।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की विमेंस टीम ने 2024 में मेंस टीम से पहले ट्रॉफी जीत ली थी। तब स्मृति मंधाना की कप्तानी वाली RCB ने दिल्ली कैपिटल्स को फाइनल हराया था। एलिस पेरी और सोफी डिवाइन टूर्नामेंट में टीम की बड़ी रीढ़ साबित हुईं, लेकिन दोनों ही इस बार टीम का हिस्सा नहीं हैं। वहीं कप्तान मंधाना भी शादी टूटने के बाद पहला ही टूर्नामेंट खेलने वाली हैं।
RCB विमेंस के लिए 2024 इसलिए भी खास रहा क्योंकि टीम ने बड़े मैचों में डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया। मजबूत विरोधियों के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए खिलाड़ियों ने दिखाया कि यह टीम अब सिर्फ नाम की नहीं, बल्कि प्रदर्शन की भी चैलेंजर है। फील्डिंग में चुस्ती, गेंदबाजों की अनुशासित लाइन-लेंथ और बल्लेबाजों की मैच जिताऊ पारियां टीम को बाकी फ्रेंचाइजियों से अलग बनाती हैं।
इस पूरे सफर में RCB विमेंस ने यह संदेश दिया कि महिला क्रिकेट में अब वह किसी से कम नहीं है। 2024 का सीजन टीम के लिए पहचान बदलने वाला साबित हुआ, जहां आलोचनाओं को पीछे छोड़कर उसने अपना दबदबा कायम किया। यह रुतबा सिर्फ एक ट्रॉफी या जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि टीम की मानसिकता, रणनीति और निरंतरता में झलकता है।
आगे आने वाले सीजन में सबसे बड़ी चुनौती इसी स्तर को बनाए रखने की होगी। लेकिन 2024 के प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि RCB विमेंस अब दबाव में बिखरने वाली टीम नहीं रही। उसने खुद को चैंपियन मानसिकता वाली टीम के रूप में स्थापित कर लिया है।


















