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नई दिल्ली, विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के मौजूदा चक्र में भारत की स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। हाल के मैचों में प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव, महत्त्वपूर्ण मौकों पर विकेटों का गिरना, और तेज गेंदबाज़ों की अनुपलब्धता के कारण टीम के अंक तालिका में आगे बढ़ने की उम्मीदें और कमजोर पड़ गई हैं। मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए WTC फाइनल की दौड़ भारत के लिए पहले से भी ज्यादा कठिन दिखने लगी है।

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन साउथ अफ्रीका के हाथों 0-2 से क्लीन स्वीप होने के बाद भारत ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) रैंकिंग में पाकिस्तान से नीचे पहुंच गया है। पाकिस्तान 50% पॉइंट्स के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि भारत 48.15% पॉइंट्स के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गया।

साउथ अफ्रीका ने भारत को दूसरी पारी में 140 रन पर समेट दिया और 408 रन से जीत दर्ज की। यह भारत की टेस्ट में रन के अंतर से सबसे बड़ी हार रही। इस जीत के साथ अफ्रीकी टीम ने WTC पॉइंट्स टेबल के दूसरे नंबर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

फाइनल में पहुंचने के लिए 9 टेस्ट में से 7 जीत जरूरी भारत को इस WTC साइकल में 18 टेस्ट खेलने हैं। टीम 9 खेल चुकी हैं और अभी 9 टेस्ट मैच बाकी हैं। भारत के पास 48.15% परसेंटेज पॉइंट्स हैं।

पिछले WTC साइकल को देखें तो फाइनल में पहुंचने के लिए आमतौर पर 55%-65% के बीच का पॉइंट्स चाहिए होते हैं। इसका मतलब है कि भारत को बचे हुए 9 टेस्ट में कम से कम 6 या 7 जीत जरूरी होगी। कुछ मैच ड्रॉ खेलने से भी भारत को फायदा हो सकता है, लेकिन 3 से ज्यादा मैच हारने पर टीम बाहर हो जाएगी। खिलाड़ियों की फिटनेस, स्थिर बल्लेबाज़ी, नई गेंद से शुरुआती सफलता और दबाव में सही निर्णय—ये वे कारक हैं जिन पर भारत की भविष्य की WTC यात्रा निर्भर करेगी।
यदि टीम इन क्षेत्रों में सुधार दिखाती है, तो फाइनल की दौड़ में वापसी अब भी संभव है। लेकिन मौजूदा स्थिति कहती है कि भारत के लिए WTC फाइनल अब दूरी पर खड़ा एक कठिन लक्ष्य बन चुका है।