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नई दिल्ली,  शतरंज की दुनिया में एक ऐतिहासिक फैसला हुआ है। साइप्रस पहली बार प्रतिष्ठित चेस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा। यह वही टूर्नामेंट है जो विश्व शतरंज चैंपियनशिप के लिए चुनौती देने वाले खिलाड़ी को तय करता है। यानी, जो खिलाड़ी यहां जीतता है—उसे मौजूदा विश्व चैंपियन से टाइटल मैच खेलने का मौका मिलता है।

साइप्रस को यह आयोजन मिलने के साथ यूरोप के छोटे लेकिन उभरते देशों की शतरंज दुनिया में पकड़ और मजबूत होती जा रही है। अब तक रूस, अमेरिका, स्पेन और जर्मनी जैसे देशों ने इस टूर्नामेंट की मेजबानी की है, लेकिन पहली बार यह जिम्मेदारी पूर्वी यूरोप के इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण देश को मिली है।

वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के मौजूदा साइकल का सबसे अहम टूर्नामेंट FIDE कैंडिडेट्स का अयोजन 28 मार्च से 16 अप्रैल के बीच खेला जाएगा। इसकी मेजबानी साइप्रस को दी गई है। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 75 साल पुराना टूर्नामेंट है। इसकी शुरुआत 1950 में हुई थी।

साइप्रस पहली बार इस टूर्नामेंट की मेजबानी करने जा रहा है। यह जानकारी इंटरनेशनल चेस फेडरेशन (FIDE) ने सोमवार को दी। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाला खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियन के साथ वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप का फाइनल मैच खेलता है। गुकेश ने जीता था पिछला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट पिछली बार भारत के डी गुकेश ने इसे जीतकर चीन के डिंग लिरेन को चुनौती दी थी। तब गुकेश कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी बने थे। 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने 1995 में पहली बार कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता था।

भारत शतरंज की नई शक्ति बनकर उभरा है। प्रज्ञानानंद, विदित गुजराती, अरुणा-हिकारू जैसी युवा पीढ़ी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है। अगर भारतीय खिलाड़ी इसमें क्वालीफाई करते हैं, तो यह देश के लिए ऐतिहासिक पल हो सकता है।