नई दिल्ली, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया एशेज टेस्ट क्रिकेट इतिहास के सबसे छोटे मुकाबलों में शामिल हो गया, जब यह मैच सिर्फ 2 दिन में ही खत्म हो गया। आमतौर पर पांच दिन तक चलने वाला टेस्ट मैच इतनी जल्दी समाप्त होना अपने आप में असाधारण माना जाता है। इस मुकाबले में गेंदबाज़ों का पूरी तरह से दबदबा रहा, जबकि दोनों टीमों के बल्लेबाज़ पिच और परिस्थितियों के आगे बेबस नजर आए।
एशेज सीरीज का चौथा टेस्ट महज दो दिन में समाप्त हो गया। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर शनिवार को इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से हराया। मैच 852 बॉल में खत्म हो गया। यह बॉल के लिहाज से इस सीरीज के 143 साल के इतिहास का चौथा सबसे छोटा टेस्ट है।
इस मैच के दूसरे दिन 16 विकेट गिरे, जबकि पहले दिन 20 विकेट गिरे थे। इसमें कोई भी बैटर 50 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका और न ही टीम 200 रन का आंकड़ा पार कर सकी।
ऐसे में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की पिच पर सवाल उठने लगे हैं। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन, माइकल वान, दिनेश कार्तिक ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान वान ने लिखा- यह पिच है या मजाक? इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर पीटरसन बोले- ये भारत में होता तो आलोचना होती।
36 में से 35 विकेट पेसर्स को मिले MCG पिच पर 10 मिमी घास छोड़ने के फैसले से पिच से तेज गेंदबाजों को बहुत फायदा मिला। इससे बैटिंग करना कठिन हो गया था। इस मैच में 35 विकेट तेज गेंदबाजों को मिले हैं। जबकि एक बैटर रनआउट हुआ।
एशेज के पहले तीन मैच भी कुल मिलाकर 11 दिन तक चले। इस तरह से वर्तमान सीरीज में कुल 20 मैच दिनों में से केवल 13 दिन ही खेल हो पाया है। पर्थ में खेला गया पहला टेस्ट मैच भी दो दिन में समाप्त हो गया था।
ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ों ने घरेलू हालात का शानदार इस्तेमाल करते हुए इंग्लैंड के शीर्ष क्रम को बिखेर दिया। वहीं इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने भी जवाबी हमला करते हुए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। दोनों टीमों के लिए एक-एक सेशन भी संभालकर खेलना मुश्किल साबित हुआ। नतीजा यह रहा कि हर पारी में विकेटों की झड़ी लगी रही।
दूसरे दिन भी हालात में ज्यादा बदलाव नहीं आया। बल्लेबाज़ों ने संयम दिखाने की कोशिश जरूर की, लेकिन गेंदबाज़ों की सटीक लाइन-लेंथ और आक्रामक फील्डिंग ने उन्हें टिकने नहीं दिया। दर्शकों के लिए यह मुकाबला रोमांचक जरूर रहा, लेकिन पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट की लंबी जंग देखने को नहीं मिली। दो दिनों में ही मैच का फैसला हो जाना एशेज जैसी प्रतिष्ठित सीरीज के लिए चौंकाने वाला रहा।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मुकाबले पिच तैयार करने और बल्लेबाज़ी तकनीक पर नए सिरे से बहस छेड़ते हैं। जहां कुछ लोग इसे तेज़ और रोमांचक टेस्ट क्रिकेट का उदाहरण मान रहे हैं, वहीं कई दिग्गज इसे बल्लेबाज़ों के लिए अनुचित परिस्थितियां बता रहे हैं। कुल मिलाकर, यह एशेज टेस्ट लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि इसमें क्रिकेट प्रेमियों ने पांच दिन की जगह दो दिन में ही पूरे मैच का नतीजा देख लिया।













