भारतीय बैडमिंटन जगत में इन दिनों चयन को लेकर विवाद छिड़ गया है। अनुभवी खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने हाल ही में टीम चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ खिलाड़ियों का चयन प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि पक्षपात और “जी-हुजूरी” के कारण किया जा रहा है। श्रीकांत ने खासतौर पर युवा खिलाड़ी हर्षित का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें टीम में जगह सिर्फ इसलिए मिली क्योंकि वे कोच की हर बात बिना सवाल माने चलते हैं।
भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने मंगलवार को हर्षित राणा को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर चुने जाने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने नई दिल्ली में वेस्टइंडीज पर 7 विकेट की जीत के बाद कहा- ‘हर्षित के पिता सिलेक्टर नहीं, वे अपने दम पर टीम में आए है।’
श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर आरोप लगाया था- ‘राणा केवल गंभीर की वजह से भारतीय टीम में हैं। उन्हें ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए वनडे टीम में इसलिए चुना गया, क्योंकि वे गंभीर की जी-हुजूरी करते हैं।’ इस पर गंभीर ने पलटवार करते हुए कहा- ‘एक 23 वर्षीय खिलाड़ी को निशाना बनाना शर्मनाक है।’
दिल्ली के तेज गेंदबाज हर्षित राणा ने पिछले साल गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद तीनों फॉर्मेट में डेब्यू किया है। उन्होंने दो टेस्ट, पांच वनडे और तीन टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। जबकि भारतीय टीम ने गंभीर की कोचिंग में 7 टेस्ट, 11 वनडे और 25 टी-20 मैच खेले हैं।
19 अक्टूबर को भारतीय चयनकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज का ऐलान किया था। यहां हर्षित राणा को टीम में जगह दी गई थी। इस पर पूर्व भारतीय कप्तान क्रिस श्रीकांत ने सवाल उठाया था।
यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि गंभीर और हर्षित दिल्ली के रहने वाले हैं। दोनों KKR के जरिए एक-दूजे से जुड़े हुए हैं। जब गंभीर KKR के मेंटोर थे, तब हर्षित राणा 2024 का IPL जीतने वाली टीम का हिस्स्सा थे।
किदांबी श्रीकांत का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत असंतोष नहीं, बल्कि भारतीय खेल संरचना में व्याप्त गुटबाज़ी और पक्षपात के सवाल को फिर से उजागर करता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संघ इस विवाद को सुलझाने और खिलाड़ियों का विश्वास बहाल करने के लिए क्या कदम उठाता है।


















