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नई दिल्ली, भारत में खेलने का दबाव दुनिया की लगभग हर टीम महसूस करती है, लेकिन साउथ अफ्रीका के लिए यह चुनौती पिछले एक दशक से और भी कठिन साबित हुई है। पिछले 10 वर्षों में अफ्रीका भारत में एक भी टी-20 सीरीज नहीं जीत पाया—और यह आंकड़ा सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि कई गहरे कारणों, रणनीतिक कमियों और भारतीय परिस्थितियों में सामंजस्य की कमी का संकेत है।

भारत में साउथ अफ्रीका ने पिछली टी-20 सीरीज 2015 में जीती थी। उसके बाद से प्रोटियाज (साउथ अफ्रीका) यहां तीन बार टी-20 सीरीज खेलने आए, लेकिन एक बार भी जीत हासिल नहीं कर पाए। ओवरऑल सीरीज रिकॉर्ड भी भारत के पक्ष में है। दोनों टीमों के बीच अब तक 10 टी-20 सीरीज हुईं, जिनमें भारत ने 5 और साउथ अफ्रीका ने 2 जीतीं, जबकि 3 सीरीज ड्रॉ रहीं।

आज दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की टी-20 सीरीज का पहला मुकाबला कटक के बाराबाती स्टेडियम में खेला जाएगा। भारत वनडे सीरीज 2-1 से जीत चुका है और टी-20 में भी जीत के साथ शुरुआत करना चाहेगा। वहीं साउथ अफ्रीका ने टेस्ट सीरीज 2-0 से जीती थी।

2018 से अब तक अफ्रीकी टीम भारत के खिलाफ न भारत में और न ही अपने घरेलू मैदान पर कोई टी-20 सीरीज जीत पाई है। पहला टी-20 शाम 7 बजे शुरू होगा और टॉस 6:30 बजे होगा। इस मैच में उप-कप्तान शुभमन गिल और ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या चोट के बाद वापसी करेंगे।

अब तक भारत और साउथ अफ्रीका के बीच 31 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले गए। इनमें भारत ने 18 मैच जीते, जबकि साउथ अफ्रीका ने 12 बार जीत हासिल की। एक मुकाबला बेनतीजा रहा। भारतीय जमीन पर दोनों टीमों के बीच 12 टी-20 मैच हुए। साउथ अफ्रीका 6 मैच जीतकर थोड़ा आगे है, जबकि भारत ने 5 मैच जीते। एक मैच का परिणाम नहीं निकला।

अभिषेक शर्मा टॉप स्कोरर इस साल टी-20 में भारत के लिए अभिषेक शर्मा ने सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। उन्होंने 17 मैचों में 756 रन बनाए, वो भी 196 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट के साथ। इस दौरान उनके बल्ले से 1 शतक और 5 अर्धशतक निकले। वे इस समय भारत के नंबर-1 टी-20 बैटर हैं।
डेवाल्ड ब्रेविस SA के टॉप बैटर साउथ अफ्रीका के लिए इस टी-20 सीरीज में सबसे ज्यादा ध्यान डेवाल्ड ब्रेविस पर रहेगा। उन्होंने इस साल 13 मैचों में 395 रन बनाए हैं, उन्होंने 183.72 के शानदार स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की है। इस दौरान उनके नाम एक शतक और एक अर्धशतक भी दर्ज हैं। ब्रेविस की तेजतर्रार बैटिंग भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
भारतीय उपमहाद्वीप में सफलता के लिए सिर्फ ताकतवर बल्लेबाज़ या तेज़ गेंदबाज़ पर्याप्त नहीं—पिच को पढ़ने की समझ, रणनीति की स्पष्टता और दबाव झेलने की क्षमता आवश्यक है।
दक्षिण अफ्रीका के लिए भारत में टी-20 सीरीज जीतने में विफलता पिछले दशक का बड़ा ट्रेंड बन गया है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वर्षों में अफ्रीका इन कमजोरियों को दूर कर इस दहाई-अंकों वाले अंतराल को खत्म कर पाता है या नहीं।