1758596793Sourav Ganguly is back as CAB president after six years
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नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली छह साल बाद एक बार फिर क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष बने हैं। यह वापसी न केवल बंगाल क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रशासन में गांगुली की मजबूत पकड़ को भी दर्शाती है।

गांगुली की वापसी का महत्व

सौरव गांगुली ने CAB अध्यक्ष के रूप में अपने पहले कार्यकाल (2015-2019) में कई अहम सुधार किए थे। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने, ढांचे को आधुनिक बनाने और पारदर्शिता लाने पर विशेष जोर दिया। इसके बाद वे बीसीसीआई अध्यक्ष बने और भारतीय क्रिकेट में कई बड़े बदलावों के सूत्रधार रहे। अब उनका दोबारा CAB प्रमुख बनना बंगाल क्रिकेट के लिए एक नई उम्मीद है।

CAB के लिए चुनौतियाँ

गांगुली के सामने अब कई बड़ी चुनौतियाँ होंगी:

  1. घरेलू क्रिकेट का विकास – बंगाल की रणजी और अन्य घरेलू टीमों को और मजबूत बनाना।

  2. इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार – स्टेडियम, अभ्यास पिच और ट्रेनिंग सुविधाओं को और आधुनिक बनाना।

  3. युवा खिलाड़ियों को मौका – ग्रामीण और छोटे कस्बों से नए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सामने लाना।

  4. पारदर्शी प्रशासन – क्रिकेट प्रशासन को निष्पक्ष और खिलाड़ियों के हित में बनाए रखना।

गांगुली की लोकप्रियता

‘दादा’ के नाम से मशहूर गांगुली की लोकप्रियता बंगाल और भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में है। उनकी वापसी से बंगाल क्रिकेट के प्रशंसकों में उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि उनकी अगुवाई में CAB फिर से भारतीय क्रिकेट में मजबूत भूमिका निभा सकता है।

भविष्य की राह

गांगुली का CAB अध्यक्ष बनना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि आने वाले समय में वे भारतीय क्रिकेट की नीतियों और दिशा पर अप्रत्यक्ष रूप से असर डाल सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका दूसरा कार्यकाल बंगाल क्रिकेट को किस ऊंचाई तक पहुंचाता है।