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नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेट टीम के भरोसेमंद मध्यक्रम बल्लेबाज़ श्रेयस अय्यर ने एक बार फिर अपनी फिटनेस को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगा दिया है। चोट से वापसी के बाद अय्यर ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेलते हुए यह दिखा दिया कि वह पूरी तरह फिट हैं और लंबे फॉर्मेट से लेकर सीमित ओवरों तक के क्रिकेट के लिए तैयार हैं। मैदान पर उनकी फुर्ती, लंबे स्पेल तक बल्लेबाज़ी करने की क्षमता और लगातार मैच खेलने का स्टैमिना इस बात का प्रमाण है कि फिटनेस को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही थीं, वे अब बीते दिनों की बात हो चुकी हैं।

भारतीय वनडे टीम के उप कप्तान श्रेयस अय्यर (82 रन) ने विजय हजारे ट्रॉफी में हाफ सेंचुरी जमाकर अपनी फिटनेस साबित कर दी है। उन्होंने जयपुर में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ मुंबई की कप्तानी की। अय्यर को न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया में चुना गया है, हालांकि उनका खेलना फिटनेस साबित करने पर निर्भर है।

वहीं, गोवा के खिलाफ 212 रन चेज कर रही पंजाब के ओपनर प्रभसिमरन सिंह 2 और भारतीय कप्तान शुभमन गिल 11 रन बनाकर आउट हुए। हालांकि, टीम ने मुकाबला जीत लिया। दूसरी ओर प्लेट ग्रुप के फाइनल में बिहार ने मणिपुर को हराकर खिताब जीत लिया।

भारतीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं के लिए यह संकेत साफ है कि श्रेयस अय्यर अब फिटनेस के मोर्चे पर पूरी तरह भरोसेमंद विकल्प बन चुके हैं। मध्यक्रम में उनकी भूमिका बेहद अहम है, क्योंकि वह स्पिन के खिलाफ आक्रामकता और तेज़ गेंदबाज़ों के खिलाफ संयम—दोनों का संतुलन बखूबी साधते हैं। साथ ही दबाव में रन बनाने की उनकी क्षमता टीम को मुश्किल हालात से निकालने में मदद करती है।

फिटनेस साबित होने के साथ-साथ अय्यर की कप्तानी और मैच-रीडिंग भी चर्चा में रही है। घरेलू क्रिकेट में नेतृत्व करते हुए उन्होंने रणनीतिक समझ और खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाने की क्षमता दिखाई। इससे यह भी संकेत मिलता है कि वह भविष्य में टीम के नेतृत्व समूह का अहम हिस्सा बने रह सकते हैं।

कुल मिलाकर, श्रेयस अय्यर ने अपने प्रदर्शन और फिटनेस—दोनों से यह साफ कर दिया है कि वह चयन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आने वाले बड़े टूर्नामेंट और अहम सीरीज़ में उनसे भारतीय टीम को मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद है।