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नई दिल्ली, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदने के फैसले पर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के मालिक और बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के कथित विरोध की चर्चा तेज़ हो गई है। इस मुद्दे ने क्रिकेट और राजनीति के संवेदनशील रिश्ते को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

बांग्लादेश में हिंदुओं की हो रही हत्या पर धर्मगुरुओं देवकीनंदन ठाकुर और जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने गुरुवार को आपत्ति जताई। कहा कि इसके बावजूद बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को IPL में क्यों खरीदा गया।

रामभद्राचार्य ने कहा, ‘शाहरुख खान हीरो नहीं है। उनका कोई चरित्र नहीं है।

शाहरुख की फ्रैंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने क्रिकेटर रहमान को 9.2 करोड़ रुपए में खरीदा है।

देवकीनंदन ने कहा कि एक टीम मालिक इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है कि वह उस देश के क्रिकेटर को अपनी टीम में शामिल करे, जहां हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है।

दरअसल, बांग्लादेश में 12 दिन में 3 हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है। भारत में इसका विरोध हो रहा है। कई जगह प्रदर्शन हो रहे हैं।

आईपीएल में अब तक बहुत कम बांग्लादेशी खिलाड़ियों को अवसर मिला है, और जब भी किसी खिलाड़ी का नाम नीलामी सूची में आता है, तो उसे लेकर बहस शुरू हो जाती है। कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों को कम मौके मिलने के पीछे सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक माहौल भी एक अहम कारण रहा है। इसी पृष्ठभूमि में शाहरुख खान के विरोध की खबर ने इस बहस को और हवा दी है।

केकेआर के समर्थकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ प्रशंसक इसे फ्रेंचाइज़ी का रणनीतिक फैसला मान रहे हैं, वहीं कुछ का कहना है कि खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर यह बहस तेज़ हो गई है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या आईपीएल जैसे वैश्विक मंच पर किसी खिलाड़ी की राष्ट्रीयता को चयन का आधार बनाना उचित है।

बीसीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। लेकिन खेल जगत में यह चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि भविष्य में आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों की भागीदारी और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अगर ऐसे विरोध खुलकर सामने आते हैं, तो इससे लीग की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी असर पड़ सकता है।