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नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने हालिया हार पर अपनी बेबाक राय रखते हुए एक महत्वपूर्ण बात कही है—“हार की जिम्मेदारी सिर्फ कोच पर नहीं डाली जा सकती।” उनका यह बयान न सिर्फ टीम मैनेजमेंट के दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी बताता है कि क्रिकेट जैसे बड़े और जटिल खेल में जिम्मेदारी साझा होती है, एक व्यक्ति पर नहीं टिकी होती।

शास्त्री का कहना है कि जब टीम जीतती है, तो जीत का श्रेय सभी को मिलता है—खिलाड़ियों को भी, सपोर्ट स्टाफ को भी और कोच को भी। ठीक उसी तरह, जब टीम हारती है, तो हार की जिम्मेदारी भी सामूहिक होती है। उनके अनुसार, मैदान पर खेल खिलाड़ी ही खेलते हैं, रणनीति से लेकर अमल तक सबमें टीमवर्क अहम है। इसलिए किसी एक व्यक्ति—खासकर कोच—को दोषी ठहरा देना खेल की वास्तविकता को नजरअंदाज करने जैसा है।

भारतीय क्रिकेट टीम के लगातार दो घरेलू टेस्ट सीरीज क्लीन स्वीप हारने के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर पर सवाल उठ रहे हैं। टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जीतकर अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन रेड-बॉल क्रिकेट में प्रदर्शन गिरा है। इसी मुद्दे पर पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने कहा कि हार की जिम्मेदारी सिर्फ कोच पर डालना उचित नहीं है, खिलाड़ियों को भी आगे आना होगा।

शास्त्री बोले ‘सिर्फ एक इंसान को निशाना बनाना गलत एक अखबार के यूट्यूब पॉडकास्ट में शास्त्री ने कहा,’जब नतीजे खराब आते हैं, तो खिलाड़ियों को भी आगे आकर जवाब देना चाहिए। सिर्फ कोच को निशाना बनाना गलत है। मेरे समय में भी ऐसा हुआ है,इसलिए अनुभव से कह रहा हूं। खिलाड़ियों को हार का दर्द महसूस होना चाहिए, तभी बदलाव आएगा। हर मैच जीतना जरूरी है, नहीं जीतेंगे तो सवाल उठेंगे।’

कोचिंग में रणनीति के साथ धैर्य और संवाद भी जरूरी शास्त्री ने आगे कहा कि कोचिंग सिर्फ रणनीति तक सीमित नहीं होती। कोचिंग में धैर्य, संवाद और मैन-मैनेजमेंट सबसे महत्वपूर्ण हैं। खिलाड़ियों से सही तरीके से बात करना आता हो,तभी आप उन्हें प्रेरित कर सकते हैं। मुख्य कोच पर दबाव हमेशा रहेगा, इसलिए संतुलन जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि टीम की हार हमेशा सामूहिक होती है। टीम मैनेजमेंट से लेकर खिलाड़ियों तक, सभी जिम्मेदार होते हैं।

गंभीर- शास्त्री के बीच पुराना विवाद भी चर्चा में गौतम गंभीर पहले भी कई मौकों पर शास्त्री की आलोचना कर चुके हैं। 2021 में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में गंभीर ने शास्त्री के उस बयान पर नाराजगी जताई थी, जिसमें उन्होंने विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम को ‘दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टेस्ट टीम’ कहा था।

यह बयान उस समय आया है जब हार के बाद चर्चाओं में कोच की भूमिका को निशाना बनाया जा रहा था। शास्त्री के अनुसार, यह समय आरोप लगाने का नहीं, बल्कि टीम को साथ लेकर आगे बढ़ने का है।

अंततः, उनका संदेश साफ है—क्रिकेट एक सामूहिक खेल है, और इसकी हार-जीत भी सामूहिक होती है। दोषारोपण की बजाय टीमवर्क और सुधार पर जोर देना ही असली समाधान है।