नई दिल्ली, भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में जम्मू और कश्मीर ने 67 साल के लंबे इंतजार के बाद पहली बार फाइनल में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि न केवल राज्य की टीम के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के क्रिकेट प्रेमियों के लिए गर्व का क्षण है।
जम्मू-कश्मीर की टीम ने पूरे सीजन में अनुशासित और संतुलित प्रदर्शन किया। बल्लेबाजों ने महत्वपूर्ण मौकों पर बड़ी पारियां खेलीं, जबकि गेंदबाजों ने निर्णायक क्षणों में विकेट निकालकर मैच का रुख मोड़ा। खास बात यह रही कि टीम ने दबाव की परिस्थितियों में संयम बनाए रखा और अनुभवी व युवा खिलाड़ियों का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला।
67 साल के घरेलू क्रिकेट इतिहास में पहली बार जम्मू-कश्मीर रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंच गया है।
कल्याणी में खेले गए रणजी ट्रॉफी के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में जम्मू-कश्मीर ने दो बार की पूर्व चैंपियन बंगाल को 6 विकेट से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। जीत के लिए मिले 126 रनों के छोटे लक्ष्य को टीम ने चौथे दिन 34.4 ओवर में 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया।
वंशज शर्मा ने 43 रन बनाए, जबकि IPL स्टार अब्दुल समद 30 रन बनाकर नाबाद रहे और टीम को जीत तक पहुंचाया। इस जीत के हीरो तेज गेंदबाज आकीब नबी रहे, जिन्होंने मैच में कुल 9 विकेट लेकर बंगाल की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। इसके अलावा उन्होंने पहली पारी में 42 रन बनाकर टीम की जीत में अहम योगदान भी दिया।
सेमीफाइनल मुकाबले में टीम ने मजबूत प्रतिद्वंद्वी को हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया। पहली पारी की बढ़त और दूसरी पारी में कसी हुई गेंदबाजी ने जीत की नींव रखी। फील्डिंग में भी खिलाड़ियों ने चुस्ती दिखाई, जिससे विपक्ष को अतिरिक्त रन नहीं मिल पाए।
इस ऐतिहासिक सफर में टीम प्रबंधन की रणनीति और खिलाड़ियों की मेहनत निर्णायक रही। लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में संघर्ष कर रही टीम के लिए यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। राज्य में क्रिकेट संरचना और प्रतिभाओं को लेकर नई उम्मीद जगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और अवसर मिलने पर किसी भी क्षेत्र की टीम राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। अब सभी की नजरें फाइनल मुकाबले पर होंगी, जहां जम्मू-कश्मीर खिताब जीतकर अपने स्वर्णिम अभियान को और यादगार बनाना चाहेगा।

















