नई दिल्ली, पर्थ टेस्ट का पहला दिन पूरी तरह ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों के नाम रहा। इंग्लैंड की टीम पहली पारी में सिर्फ 172 रन पर ऑलआउट हो गई। यह स्कोर उस विकेट पर बेहद कम माना जा रहा है, जहां शुरुआती सत्र में बल्लेबाजी अपेक्षाकृत आसान थी। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पेसर्स की सटीक लाइन-लेंथ और अतिरिक्त बाउंस ने इंग्लिश बल्लेबाजों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दीं।
मैच की शुरुआत में इंग्लैंड ने आक्रामक रवैया अपनाने की कोशिश की, लेकिन लगातार विकेट गिरते रहे। शीर्ष क्रम एक बार फिर अस्थिर नज़र आया। ओपनर डकिट और क्रॉली अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल सके। मध्यक्रम भी कंगारू गेंदबाजी का दबाव झेल नहीं सका।
जो रूट से इंग्लैंड को सबसे अधिक उम्मीदें थीं, लेकिन वे भी लायन की घूमती गेंद का शिकार बन गए। हैरी ब्रूक और बेयरस्टो ने कुछ समय टिकने का प्रयास किया, मगर ऑस्ट्रेलियाई पेस से जूझते रहे। इंग्लैंड की पूरी पारी 50 ओवर भी नहीं टिक सकी।
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज का पहला मुकाबला पर्थ में खेला जा रहा है। आज मैच का पहला दिन है और इंग्लैंड दूसरे सेशन में ही 172 रन पर ऑलआउट हो गई। ऑस्ट्रेलियाई पेसर मिचेल स्टार्क ने 7 विकेट झटके। उन्होंने एशेज में अपने 100 विकेट भी पूरे कर लिए।
शुक्रवार को मैच के पहले दिन इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया। टीम का यह फैसला गलत साबित हुआ। टीम के लिए उप कप्तान हैरी ब्रूक (52) और ओली पोप (46) के अलावा कोई और खिलाड़ी बड़ी पारी नहीं खेल सका।
पोप 46 रन बनाकर आउट इंग्लिश टीम को शुरुआती झटका पहले ही ओवर में लगा, जब मिचेल स्टार्क ने जैक क्रॉउली को शून्य पर LBW कर पवेलियन भेजा। इसके बाद उन्होंने बेन डकेट (21) को आउट किया। और फिर जो रूट को खाता खोले बिना स्लिप में लाबुशेन के हाथों कैच कराया।
इसके बाद ब्रूक ने ओली पोप के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 55 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को संभाला। लेकिन इस साझेदारी को कैमरन ग्रीन ने तोड़ा, जब उन्होंने पोप को 46 रन पर LBW किया।
पर्थ की पिच पर हमेशा की तरह तेज और बाउंस देखने को मिला, जिसका ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने भरपूर फायदा उठाया। इंग्लैंड की बल्लेबाजी न तो तकनीकी रूप से मजबूत दिखी और न ही मानसिक रूप से तैयार।
अब मुकाबले में इंग्लैंड की वापसी गेंदबाजी पर निर्भर करेगी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की टीम मानसिक बढ़त हासिल कर चुकी है। यदि इंग्लैंड अगले सत्र में शुरुआती विकेट नहीं ले पाता, तो मैच जल्दी हाथ से निकल सकता है।
पर्थ टेस्ट के इस शुरुआती घटनाक्रम ने इंग्लैंड की रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार विदेशी दौरों पर इंग्लिश टीम की बल्लेबाजी फ्लॉप हो रही है, और कोचिंग स्टाफ पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले दिन उनके लिए निर्णायक साबित होंगे।

















