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नई दिल्ली,  हाल ही में खेले गए अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के बाद Pakistan national cricket team ने अंपायरिंग को लेकर सवाल उठाए हैं। टीम से जुड़े कुछ खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि मैच के दौरान दिए गए कुछ फैसलों ने मुकाबले की दिशा को प्रभावित किया।

मीरपुर में खेले गए तीसरे वनडे में अंपायर के एक फैसले को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने मैच रेफरी नियामुर राशिद से शिकायत की है। पाकिस्तान का कहना है कि ऑन-फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना ने बांग्लादेश को गलत तरीके से LBW रीव्यू लेने की अनुमति दी।

पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट का आरोप है कि बांग्लादेश ने रीव्यू उस समय लिया जब गेंद का रिप्ले पहले ही स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर दिखाया जा चुका था।

क्या है पूरा मामला घटना मैच की आखिरी दो गेंदों से जुड़ी है। उस समय पाकिस्तान को जीत के लिए दो गेंदों में 12 रन चाहिए थे। रिशाद हुसैन की गेंद शाहीन अफरीदी के पास से लेग साइड की तरफ निकल गई, जिस पर अंपायर ने वाइड दे दिया। इसके बाद बांग्लादेश के खिलाड़ियों ने आपस में चर्चा की और LBW के लिए रीव्यू लिया।

मैच के अहम पलों में अंपायर द्वारा दिए गए फैसलों को लेकर पाकिस्तान टीम की ओर से असंतोष जताया गया। खास तौर पर एक विवादित आउट और कुछ करीबी अपीलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के क्रिकेट हलकों में यह कहा जा रहा है कि ऐसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में अंपायरिंग पूरी तरह सटीक और पारदर्शी होनी चाहिए।

क्रिकेट विश्लेषकों का कहना है कि आधुनिक क्रिकेट में तकनीक जैसे DRS का उपयोग विवाद कम करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद कभी-कभी मैदान पर दिए गए फैसले विवाद का कारण बन जाते हैं। ऐसे मामलों में टीमों और प्रशंसकों की प्रतिक्रियाएं भी काफी तीखी हो जाती हैं।

वहीं दूसरी ओर मैच अधिकारियों का कहना है कि सभी फैसले उपलब्ध तकनीक और नियमों के अनुसार लिए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंपायरिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए लगातार नई तकनीकों और नियमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्रिकेट जगत में इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है और कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अंपायरिंग में और अधिक तकनीकी सहायता शामिल की जा सकती है ताकि विवाद की संभावना कम हो सके।