नई दिल्ली, मलेशिया ओपन 2026 में भारतीय बैडमिंटन टीम का सफर समाप्त हो गया है। टूर्नामेंट के निर्णायक चरण में भारतीय खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, जहां क्वार्टरफाइनल और उससे आगे के मुकाबलों में उन्हें हार झेलनी पड़ी। इसके साथ ही भारत की खिताब जीतने की उम्मीदों पर विराम लग गया।
कुआलालंपुर में खेले जा रहे BWF सुपर 1000 मलेशिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारत की चुनौती पूरी तरह समाप्त हो गई है। विमेंस सिंगल्स में दो बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा, जबकि मेंस डबल्स में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी क्वार्टरफाइनल में बाहर हो गई। इसके साथ ही टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों का अभियान खत्म हो गया।
सेमीफाइनल में वांग झी यी से हारीं सिंधु
विमेंस सिंगल्स के सेमीफाइनल में पीवी सिंधु का सामना चीन की वर्ल्ड नंबर-2 खिलाड़ी वांग झी यी से हुआ। सिंधु को सीधे गेमों में 16-21, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा।
मैच के दोनों गेमों में सिंधु ने शुरुआती बढ़त जरूर बनाई, लेकिन निर्णायक पलों में वह इसे बरकरार नहीं रख सकीं। पहले गेम में 3-4 अंकों की बढ़त के बाद की गई गलतियों का फायदा वांग झी यी ने उठाया। दूसरे गेम में सिंधु ने बैकहैंड साइड पर ज्यादा लिफ्ट खेली, जिस पर वांग झी यी ने लगातार स्मैश लगाकर दबाव बनाया और मैच अपने नाम कर लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीति, फिटनेस और मैच फिनिश करने की क्षमता पर और काम करने की जरूरत है। मलेशिया ओपन जैसे बड़े टूर्नामेंट में हर अंक की अहमियत होती है और छोटी-सी चूक भी मैच का रुख बदल देती है, जिसका खामियाजा भारतीय टीम को उठाना पड़ा।
हालांकि भारत के लिए यह टूर्नामेंट पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं रहा। कुछ युवा खिलाड़ियों ने अपने खेल से संकेत दिए कि भविष्य में वे बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। अब भारतीय खिलाड़ियों का फोकस आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स पर होगा, जहां वे इस अनुभव से सीख लेकर मजबूत वापसी करने की कोशिश करेंगे।

















