नई दिल्ली, भारत के पूर्व क्रिकेटर और विश्लेषक वसीम कोटक ने हाल ही में एक जोरदार बयान देते हुए कहा कि गौतम गंभीर को कुछ लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण निशाना बना रहे हैं।
गंभीर हाल के दिनों में टीम चयन, उनकी रणनीति और क्रिकेट बोर्ड के साथ उनकी बढ़ती भूमिका को लेकर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। कोटक का यह बयान क्रिकेट जगत में नए विवाद और बहस को हवा दे रहा है।
भारतीय कोच कोटक ने ट्रेनिंग सेशन से गिल के खेलने या न खेलने के सवाल पर कहा- वे तेजी से फिट हो रहा है, क्योंकि मैं उससे कल ही मिला था। उन पर फैसला कल (21 नवंबर) शाम को लिया जाएगा, क्योंकि फिजियो और डॉक्टर देखेंगे कि पूरी तरह से फिट होने के बावजूद भी क्या मैच के दौरान फिर ऐंठन होने की आशंका है।’ वहीं, साउथ अफ्रीकी कोच ने रबाडा की फिटनेस पर कहा- ‘हम कगिसो रबाडा पर नजर रख रहे हैं। उन पर अगले 24 घंटों में कोई फैसला लेंगे।’
कोटक ने अपनी टिप्पणी में कहा कि गंभीर की स्पष्टवादिता और ईमानदारी कुछ लोगों को रास नहीं आती। उनके मुताबिक, गंभीर ऐसे व्यक्ति हैं जो बिना दबाव आए क्रिकेट और राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं। इसी वजह से कई लोग उन्हें जानबूझकर विवादों में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि गंभीर की आलोचना अक्सर तथ्यों पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत मतभेदों और निजी उद्देश्यों पर आधारित होती है।
हाल के महीनों में गंभीर कई मौकों पर मजबूत बयान देते नज़र आए—चाहे सिलेक्शन नीति पर बोलना हो, टीम के नए संयोजन पर सुझाव देना हो या क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता की बात। इन बयानों ने उन्हें जनसमर्थन तो दिया ही है, लेकिन कुछ लोगों को इससे असहजता भी हो रही है।
क्रिकेट बोर्ड के भीतर भी गंभीर की बढ़ती पकड़ को लेकर कुछ असहमति की चर्चा सामने आई है। कोटक का यह बयान इसी संदर्भ में माना जा रहा है, जो शायद गंभीर के समर्थन में एक मजबूत संदेश है।
क्रिकेट फैंस इस बयान को दो हिस्सों में देख रहे हैं—एक पक्ष गंभीर को बेबाक और देशहित में बोलने वाला नेता मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अनावश्यक विवाद को बढ़ावा देना बता रहा है।
फिर भी, यह साफ है कि गंभीर भारतीय क्रिकेट के निर्णयों में महत्वपूर्ण प्रभाव बनाते जा रहे हैं और उनके फैसलों या विचारों पर उठने वाली हर आलोचना अब सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा होगी।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या गंभीर इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हैं या फिर इसे क्रिकेट वर्कफ्लो का हिस्सा मानकर अनदेखा कर देते हैं।
















