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नई दिल्ली, श्रीलंका ने वर्ल्ड कप स्क्वॉड में कामिंडु मेंडिस की वापसी के साथ मिडिल ऑर्डर को मजबूती दी है। मेंडिस की खासियत सिर्फ उनकी सधी हुई बल्लेबाजी नहीं, बल्कि दोनों हाथों से स्पिन गेंदबाजी करने की अनोखी क्षमता भी है, जो कप्तान को मैच सिचुएशन के हिसाब से अतिरिक्त विकल्प देती है। बड़े टूर्नामेंट में जहां पिचें अलग-अलग तरह से व्यवहार करती हैं, वहां ऐसा बहुमुखी खिलाड़ी टीम बैलेंस के लिए कीमती साबित होता है।

श्रीलंका ने टी-20 वर्ल्ड कप के लिए फाइनल स्क्वॉड रिलीज कर दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 खेलने वाले धनंजय डी सिल्वा को बाहर कर कामिंडु मेंडिस की वापसी हो गई। इंजर्ड पेसर ईशान मलिंगा भी टीम का हिस्सा हैं। ऑलराउंडर दासुन शनाका टीम की कप्तानी करेंगे। टूर्नामेंट 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका में खेला जाएगा।

आउट ऑफ फॉर्म हैं कामिंडु कामिंडु मेंडिस इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ पिछली टी-20 सीरीज का हिस्सा नहीं थे। वे 2025 में 19.87 के औसत से 159 रन ही बना सके। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी 130.32 का ही रहा। वे 12 मुकाबलों में महज 6 ओवर ही बॉलिंग भी कर सके। कामिंडु की खासियत यह है कि वे दोनों हाथों से स्पिन गेंदबाजी कर लेते हैं।

मिडिल ऑर्डर में स्थिरता

मेंडिस एंकर की भूमिका निभा सकते हैं—टॉप ऑर्डर के विकेट जल्दी गिरने पर पारी को थामना, स्ट्राइक रोटेट करना और सही समय पर गियर बदलना उनकी ताकत है। स्पिन के खिलाफ फुटवर्क और गैप ढूंढने की कला उन्हें एशियाई परिस्थितियों में खास तौर पर प्रभावी बनाती है।

दो-तरफा स्पिन का टैक्टिकल फायदा

  • राइट-हैंडर्स के खिलाफ ऑफ-स्पिन एंगल

  • लेफ्ट-हैंडर्स के खिलाफ ऑर्थोडॉक्स एंगल
    यह लचीलापन कप्तान को मिडिल ओवर्स में रनगति नियंत्रित करने और मैच-अप रणनीति लागू करने में मदद देता है, खासकर तब जब मुख्य स्पिनर दबाव में हों।

फ्लोटिंग बैटिंग रोल

मेंडिस को 4, 5 या 6 नंबर पर भेजा जा सकता है—सिचुएशन के मुताबिक। चेज़ में स्थिरता चाहिए तो ऊपर, तेज फिनिश चाहिए तो नीचे—यह रोल फ्लेक्सिबिलिटी प्लेइंग इलेवन को संतुलित बनाती है।

फील्डिंग और फिटनेस

आधुनिक क्रिकेट में एथलेटिक फील्डिंग गेम-चेंजर होती है। मेंडिस की चुस्ती, इनर रिंग में तेज़ रिफ्लेक्स और बाउंड्री सेविंग प्रयास टीम की ऊर्जा बढ़ाते हैं।