नई दिल्ली, इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट ने आखिरकार ऑस्ट्रेलियाई धरती पर अपना पहला टेस्ट शतक जड़ दिया। लंबे समय से चली आ रही उनकी यह कमी इस पारी के साथ पूरी हो गई। रूट ने अपनी क्लासिक बल्लेबाजी तकनीक, धैर्य और शॉट चयन से क्रिकेट प्रेमियों को फिर से साबित कर दिया कि क्यों उन्हें आधुनिक युग का सबसे बेहतरीन टेस्ट बल्लेबाज माना जाता है।
पहले दो सेशन में उन्होंने गेंदबाजों को थकाया, फिर रन गति बढ़ाते हुए अपने शतक तक पहुंचे। इस पारी में उनका फुटवर्क, बैक-फुट पंच, और शानदार कवर ड्राइव दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाले रहे। रूट की इस शतकीय पारी ने इंग्लैंड को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया और टीम के आत्मविश्वास को भी बढ़ाया।
इंग्लैंड की खराब शुरुआत टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी इंग्लिश टीम ने 5 रन पर 2 विकेट गंवा दिए। बेन डकेट और ओली पोप खाता खोले बगैर ही पवेलियन लौट गए। दोनों को मिचेल स्टार्क ने पवेलियन भेजा। जैक क्रॉली ने फिर जो रूट के साथ सेंचुरी पार्टनरशिप कर ली। क्रॉली 76 रन बनाकर आउट हुए और दोनों के बीच 117 रन की पार्टनरशिप टूटी।
ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने कई बार उन्हें परेशान करने की कोशिश की, लेकिन रूट ने संयम से खेलते हुए हर चुनौती का जवाब दिया। इस शतक की खास बात यह रही कि उन्होंने कड़ी उछाल और तेज़ पिच पर अपनी तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया।
क्रिकेट विश्लेषकों के मुताबिक यह शतक रूट के करियर के सबसे महत्वपूर्ण मील के पत्थरों में से एक माना जाएगा, क्योंकि उन्होंने एशेज जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खुद को फिर से साबित किया है।















