नई दिल्ली । इंग्लैंड में टीम इंडिया ने 1-3 की हार को 2-2 के ड्रॉ में बदल दिया। एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के सभी 5 मैच आखिरी दिन तक चले और इसमें कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। लॉर्ड्स टेस्ट में अपना विकेट नहीं बचा सके मोहम्मद सिराज ने ओवल टेस्ट में बॉलिंग से विकेट लेकर टीम इंडिया को ऐतिहासिक जीत दिलाई। वहीं मैनचेस्टर में टीम ने हार की स्थिति को ड्रॉ में बदल दिया।
1 जनवरी 2001 से भारत ने इसी तरह विदेश में 5 ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज खेलीं। जिनमें टीम को सीरीज जीत भले न मिली हो, लेकिन ड्रामा भरपूर मिला और इनकी अहमियत भी बहुत ज्यादा रहीं।
दिसंबर 2003 में टीम इंडिया बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी (BGT) खेलने के लिए ऑस्ट्रेलिया गई। 1996 में शुरू हुई BGT में टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया जाकर एक भी मैच नहीं जीत सकी थी। टीम को ऑस्ट्रेलिया में आखिरी जीत भी 22 साल पहले फरवरी 1981 में मिली थी। तब भी सीरीज ड्रॉ ही रही थी।
युवा कप्तान सौरव गांगुली के सामने टीम को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट जिताने की चुनौती थी। ब्रिस्बेन में खेला गया पहला टेस्ट ड्रॉ रहा। गांगुली ने जरूर शतक लगाया, लेकिन टीम 16 ओवर में 199 रन का टारगेट हासिल नहीं कर सकी और मुकाबला ड्रॉ हुआ। सचिन तेंदुलकर इस मुकाबले में खाता भी नहीं खोल सके।
दूसरा टेस्ट एडिलेड में 3 दिन बाद ही शुरू हो गया। रिकी पोंटिंग की डबल सेंचुरी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने 556 रन बना दिए। भारत ने भी फाइट दिखाई, राहुल द्रविड़ ने डबल सेंचुरी और वीवीएस लक्ष्मण ने सेंचुरी लगाकर टीम को 523 तक पहुंचा दिया। 85 पर 4 विकेट गिरने के बाद दोनों ने 303 रन की साझेदारी की। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया 196 रन ही बना सका, भारत को 233 का टारगेट मिला। अजीत अगरकर ने महज 41 रन देकर 6 विकेट लिए। द्रविड़ ने फिर 72 रन बनाए और नॉटआउट रहते हुए टीम को ऐतिहासिक जीत दिला दी। हालांकि, सचिन फिर फ्लॉप रहे।
मेलबर्न के मैदान पर तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने दमदार वापसी की। पोंटिंग ने फिर डबल सेंचुरी लगाई और टीम को 9 विकेट से जीत दिलाकर सीरीज 1-1 से बराबर कर दी। वीरेंद्र सहवाग ने 195 रन जरूर बनाए, लेकिन सचिन पहली पारी में खाता नहीं खोल सके, वहीं दूसरी में 44 रन बनाकर आउट हो गए। तीनों टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें कवर्स पोजिशन या कॉट बिहाइंड कराने की कोशिश की और सचिन हर बार इस जाल में फंस गए।
सिडनी में चौथा टेस्ट 2 जनवरी को शुरू हुआ। भारत ने पहले बैटिंग की, सहवाग ने फिफ्टी लगा दी, लेकिन 128 पर टीम के 2 विकेट गिर गए। पूरी सीरीज में फ्लॉप रहे सचिन ने इस इनिंग में ठान लिया कि ऑफ साइड की ओर कोई शॉट नहीं खेलूंगा। सचिन की यह स्ट्रैटजी काम आई और उन्होंने 241 रन की पारी खेल दी। यह उस समय उनका बेस्ट टेस्ट स्कोर था। भारत ने 705 रन पर पारी डिक्लेयर की।

















