नई दिल्ली, क्रिकेट जगत में एक दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया है, जहां भारतीय फ्रेंचाइजी Sunrisers Leeds ने एक पाकिस्तानी क्रिकेटर को अपनी टीम में शामिल किया है। इस फैसले के बाद क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि आम तौर पर भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों का एक ही फ्रेंचाइजी संरचना में होना कम ही देखने को मिलता है।
भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने गुरुवार को पाकिस्तान के मिस्ट्री स्पिनर अबरार अहमद पर बोली लगाई। सनराइजर्स की CEO काव्या मारन ने खुद उन्हें 1.90 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपए) में खरीदा। इसी के साथ अबरार 21 जुलाई से शुरू हो रही द हंड्रेड लीग में किसी भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजी से जुड़ने वाले पहले पाकिस्तानी खिलाड़ी बन गए। अबरार को खरीदने पर सोशल मीडिया पर काव्या मारन की आलोचना की जा रही है।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के कारण आईपीएल फ्रेंचाइजियों ने 2009 के बाद से किसी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन नहीं किया है। चेन्नई की मीडिया कंपनी सन ग्रुप ने पिछले साल नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स में पहले 49% हिस्सेदारी ECB से और बाकी 51% यॉर्कशायर काउंटी क्लब से करीब 10 करोड़ पाउंड में खरीदी थी। इसके बाद टीम का नाम बदलकर सनराइजर्स लीड्स रखा गया।
सन ग्रुप IPL में सनराइजर्स हैदराबाद और SA20 में सनराइजर्स ईस्टर्न केप की भी मालिक है, लेकिन इन टीमों में अभी कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं है।
बताया जा रहा है कि यह सौदा इंग्लैंड में खेले जाने वाले एक फ्रेंचाइजी आधारित टूर्नामेंट के लिए किया गया है। इस लीग में दुनिया भर के खिलाड़ियों को अलग-अलग टीमों द्वारा खरीदा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत पाकिस्तानी खिलाड़ी को Sunrisers Hyderabad से जुड़ी विदेशी फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने अपनी टीम में शामिल किया है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक फ्रेंचाइजी क्रिकेट के दौर में खिलाड़ियों का अलग-अलग देशों की टीमों में खेलना आम बात होती जा रही है। इससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलता है और विभिन्न देशों के क्रिकेटरों के बीच सहयोग भी बढ़ता है।
हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और क्रिकेट संबंधों के कारण इस तरह की खबरें अक्सर सुर्खियां बन जाती हैं। इसलिए इस फैसले ने भी क्रिकेट प्रशंसकों के बीच खासा ध्यान खींचा है।
विश्लेषकों के अनुसार फ्रेंचाइजी क्रिकेट का विस्तार दुनिया भर में तेजी से हो रहा है और कई बड़ी टीमें अलग-अलग देशों की लीगों में निवेश कर रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों को एक ही फ्रेंचाइजी ढांचे के तहत खेलते हुए देखना और आम हो सकता है।


















