नई दिल्ली, भारतीय खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। भारत ने पहली बार स्क्वॉश वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही भारत ने स्क्वॉश जैसे तकनीकी और तेज़ खेल में अपनी बढ़ती ताकत को दुनिया के सामने साबित कर दिया है। यह जीत न केवल खिलाड़ियों की मेहनत का नतीजा है, बल्कि देश में स्क्वॉश के लगातार मजबूत होते ढांचे और बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था का भी प्रमाण है।
चेन्नई के एक्सप्रेस एवेन्यू मॉल में खेले गए स्क्वॉश वर्ल्ड कप के फाइनल में भारतीय मिक्स्ड टीम ने हॉन्गकॉन्ग को 3-0 से हराकर इतिहास रच दिया।
यह मिक्स्ड टीम इवेंट में भारत का पहला गोल्ड मेडल है। इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2023 में ब्रॉन्ज मेडल रहा था।
इस टूर्नामेंट में 12 टीमों ने शॉर्ट और फास्ट फॉर्मेट में हिस्सा लिया। भारत ने सेमीफाइनल में मजबूत मानी जाने वाली मिस्र की टीम को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा शुरू से अंत तक बना रहा।
जोशना चिनप्पा में जीत के साथ शुरुआत की
भारतीय टीम की अगुआई दिग्गज खिलाड़ी जोशना चिनप्पा ने की। फाइनल के पहले मुकाबले में जोशना ने हांगकांग की यी ली (वर्ल्ड नंबर-37) को 3-1 से हराकर भारत को बढ़त दिलाई। इसके बाद अभय सिंह ने एलेक्स लाउ को 3-0 से मात दी। निर्णायक मुकाबले में 17 साल की अनाहत सिंह ने टोमेटो हो को 3-0 से हराकर भारत की ऐतिहासिक जीत पक्की कर दी।
भारतीय टीम में जोशना चिनप्पा, अभय सिंह, वेलावन सेंथिलकुमार और अनाहत सिंह शामिल थे। मुकाबला देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक एक्सप्रेस एवेन्यू मॉल में मौजूद रहे।
फाइनल मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने जबरदस्त आत्मविश्वास, रणनीति और संयम का प्रदर्शन किया। मैच के दौरान दबाव भरे क्षणों में भी भारतीय टीम ने धैर्य नहीं खोया और हर रैली में आक्रामकता के साथ सटीक शॉट्स लगाए। विरोधी टीम को लगातार बैकफुट पर धकेलते हुए भारत ने निर्णायक बढ़त बनाई और अंततः खिताब अपने नाम किया।
इस जीत का महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि अब तक स्क्वॉश वर्ल्ड कप पर पारंपरिक रूप से कुछ चुनिंदा देशों का दबदबा रहा है। भारत का पहली बार चैंपियन बनना इस बात का संकेत है कि भारतीय खिलाड़ी अब वैश्विक स्तर पर शीर्ष प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। युवा खिलाड़ियों के उभरने और सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव के सही मिश्रण ने टीम को संतुलित और मजबूत बनाया।
स्क्वॉश वर्ल्ड कप की यह ऐतिहासिक जीत भविष्य के लिए भी कई दरवाजे खोलती है। इससे देश में इस खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी, नए खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख और मजबूत होगी। साथ ही, ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों में भी भारतीय स्क्वॉश टीम से अब ज्यादा उम्मीदें की जाएंगी।
कुल मिलाकर, भारत का पहली बार स्क्वॉश वर्ल्ड कप चैंपियन बनना सिर्फ एक ट्रॉफी जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय खेलों के बदलते परिदृश्य और वैश्विक सफलता की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक है।
















