नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव हाल ही में चर्चा में आ गए हैं, लेकिन इस बार वजह उनके खेल से ज्यादा उनके बयान हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने सूर्या को हिदायत दी है कि वे मैदान के बाहर राजनीतिक बयानबाजी से बचें।
दरअसल, कुछ दिनों पहले सूर्यकुमार यादव ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा संदेश साझा किया था, जिसे राजनीतिक संदर्भों से जोड़कर देखा गया। भले ही सूर्या का इरादा खिलाड़ियों और युवाओं को प्रेरित करना रहा हो, लेकिन क्रिकेट जैसे वैश्विक खेल में ऐसे बयानों को लेकर विवाद तेजी से बढ़ सकता है। ICC का नियम साफ है कि खिलाड़ियों को खेल से इतर किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचना चाहिए, ताकि क्रिकेट की निष्पक्षता और वैश्विक छवि पर असर न पड़े।
सूर्या फिलहाल भारतीय टीम के अहम सदस्य हैं और सीमित ओवर क्रिकेट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से टीम इंडिया के लिए मैच विजेता साबित हुए हैं। उनकी लोकप्रियता और सोशल मीडिया पर प्रभाव भी काफी बड़ा है। ऐसे में उनके हर बयान का असर सिर्फ प्रशंसकों पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी हो सकता है।
सूर्यकुमार ने इन टिप्पणियों के लिए खुद को “दोषी नहीं” बताया। सुनवाई में BCCI के सीओओ और क्रिकेट ऑपरेशंस मैनेजर भी सूर्यकुमार के साथ थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रिचर्डसन ने सूर्यकुमार को समझाया कि उन्हें ऐसी टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए जो राजनीतिक लगें। सजा के बारे में अभी कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह लेवल-1 का उल्लंघन है, इसलिए सूर्यकुमार को चेतावनी या 15% मैच फीस का जुर्माना हो सकता है।’
ICC की यह हिदायत बताती है कि संस्था खेल को राजनीति से पूरी तरह अलग रखना चाहती है। पिछले कुछ सालों में कई खिलाड़ियों को ऐसे मामलों में चेतावनी मिल चुकी है। क्रिकेट के नियमावली में साफ कहा गया है कि खिलाड़ी यदि राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय टिप्पणी करते हैं, तो उन पर जुर्माना या अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
टीम इंडिया मैनेजमेंट ने भी सूर्या से निजी बातचीत की है और उन्हें सलाह दी है कि वे अपनी ऊर्जा खेल पर केंद्रित रखें। फाइनल जैसे अहम मुकाबले से पहले ऐसी खबरें टीम के ध्यान भटकाने का कारण बन सकती हैं।
भारतीय प्रशंसक चाहते हैं कि सूर्या अपने बल्ले से ही जवाब दें और भारत को जीत दिलाएं, बजाय किसी विवाद में उलझने के। यह घटना एक और सबक है कि अंतरराष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों की जिम्मेदारी सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके शब्द और कार्य भी खेल की छवि को प्रभावित कर सकते हैं।


















