नई दिल्ली,क्राइस्टचर्च का यह मुकाबला आधुनिक टेस्ट क्रिकेट की उन कहानियों में शामिल हो गया है, जहां असंभव लगने वाला लक्ष्य भी दृढ़ता, धैर्य और सामूहिक जुझारूपन की मिसाल बन जाता है। चौथी पारी में 457 रन बनाना किसी भी टीम के लिए भारी चुनौती होती है, लेकिन वेस्टइंडीज ने इसे केवल पीछा करने का प्रयास नहीं बनाया, बल्कि इसे अपने आत्मविश्वास और चरित्र का बयान कर दिया। इस विशाल लक्ष्य के सामने ज्यादातर टीमों के कदम डगमगा जाते हैं, लेकिन कैरेबियाई बल्लेबाजों ने सधी हुई शुरुआत के साथ धीरे-धीरे मुकाबले की दिशा बदल दी।
न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज के बीच पहला टेस्ट ड्रॉ हो गया है। क्राइस्टचर्च में खेले गए पहले मुकाबले में कीवी टीम ने वेस्टइंडीज को जीत के लिए 531 रन का टारगेट दिया था। ऐसा लग रहा था कि न्यूजीलैंड की टीम आसानी से ये मैच जीत लेगी, लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने इसे नाकाम कर दिया।
6 दिसंबर (शनिवार) को पांचवें और आखिरी दिन का खेल खत्म हुआ, उस समय वेस्टइंडीज की टीम का स्कोर 6 विकेट पर 457 रन था। टीम मैच जीतने से सिर्फ 74 रन पीछे रह गई। शनिवार को वेस्टइंडीज ने 212/4 के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया। टीम ने दिन का खेल खत्म होने तक 2 विकेट गंवाए और 245 रन बनाए। लेकिन इस स्कोर तक मैच ड्रॉ हो गया।
52–457 के बीच पहुंचे हर रन में खिलाड़ियों की वह दृढ़ता नजर आई, जिसके लिए वेस्टइंडीज की टीम जानी जाती है—कभी आक्रामक, कभी बेहद संयमित। उनकी बल्लेबाजी ने यह भी साबित किया कि आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में चौथी पारी केवल औपचारिकता नहीं रहती, बल्कि असाधारण प्रयासों से मैच की तस्वीर बदली जा सकती है।
न्यूजीलैंड ने अपने पूरे प्रयास झोंक दिए—तेज गेंदबाजों ने रिवर्स स्विंग की कोशिश की, स्पिनर्स ने आगे बढ़कर आक्रमण किया। लेकिन पिच का स्वभाव और वेस्टइंडीज की जोड़ीदार साझेदारियों ने कीवी अटैक को बेअसर कर दिया।
अंत में 457 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचकर मैच को ड्रॉ कराने का यह प्रयास कैरेबियाई क्रिकेट के लिए मनोबल बढ़ाने वाला है। यह प्रदर्शन टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगा और भविष्य की सीरीज में उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।















