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नई दिल्ली, मैच में बल्लेबाजों पर गेंदबाजों का ऐसा दबाव देखने को मिला कि दोनों टीमें बड़ी पारी खेलने में पूरी तरह नाकाम रहीं। पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की टीम 152 रन पर सिमट गई, जबकि जवाब में इंग्लैंड की पूरी टीम महज 110 रन पर ऑलआउट हो गई। यह मुकाबला बल्लेबाजों की नहीं, बल्कि गेंदबाजों की रणनीति, सटीकता और अनुशासन की कहानी बन गया, जहां हर ओवर में विकेट गिरने का खतरा बना रहा।

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज का चौथा टेस्ट मेलबर्न में खेला जा रहा है। मैच के पहले दिन शुक्रवार को इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में 152 रन पर ऑलआउट हो गई, जबकि इंग्लैंड की टीम 110 रन ही बना सकी। इस तरह ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में 42 रन की बढ़त मिली।

ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 45.2 ओवर में इंग्लैंड की पहली पारी 29.5 ओवर में खत्म हुई। यानी 75.1 ओवर में 20 विकेट गिर गए। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने स्टंप्स तक दूसरी पारी 1 ओवर में बिना विकेट खोए 4 रन बनाए हैं। ट्रैविस हेड और नाइट वॉचमैन स्कॉट बोलैंड नाबाद लौटे। अब मैच का दूसरा दिन शनिवार को सुबह 5 बजे शुरू होगा।

ऑस्ट्रेलिया 152 रन पर ऑलआउट बॉक्सिंग-डे टेस्ट में पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत खराब रही और 91 रन तक उसके 6 विकेट गिर गए। टीम के आखिरी तीन विकेट बिना कोई रन जोड़े गिर गए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से माइकल नेसर ने सबसे ज्यादा 35 रन बनाए, जबकि उस्मान ख्वाजा ने 29 और एलेक्स कैरी ने 20 रन जोड़े। टीम के पांच बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके।

इंग्लैंड की गेंदबाजी में जोश टंग सबसे सफल रहे और उन्होंने 5 विकेट लिए। गस एटकिंसन को 2 विकेट मिले, जबकि ब्रायडन कार्स और कप्तान बेन स्टोक्स को 1-1 विकेट मिला।

ऑस्ट्रेलिया की पारी की बात करें तो शुरुआत से ही इंग्लैंड के गेंदबाजों ने कसी हुई लाइन-लेंथ रखी। नई गेंद से स्विंग और सीम मूवमेंट ने ऑस्ट्रेलियाई शीर्ष क्रम को परेशान किया। मध्यक्रम ने पारी संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन लगातार गिरते विकेटों के कारण रन गति नहीं पकड़ सके। निचले क्रम ने कुछ उपयोगी रन जोड़े, जिसके दम पर ऑस्ट्रेलिया 150 के पार पहुंच पाया, लेकिन स्कोर फिर भी प्रतिस्पर्धी से कम ही नजर आया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम भी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के आगे टिक नहीं सकी। तेज गेंदबाजों ने उछाल और गति का भरपूर इस्तेमाल किया, जबकि स्पिनरों ने बीच के ओवरों में रन रोककर दबाव और बढ़ा दिया। इंग्लैंड का शीर्ष क्रम जल्दी ढह गया और इसके बाद मध्यक्रम भी जिम्मेदारी नहीं उठा सका। विकेटों के पतन ने टीम को संभलने का मौका ही नहीं दिया और पूरी टीम 110 रन पर सिमट गई।