नई दिल्ली, ऑस्ट्रेलिया को ICC पुरुष टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अनुभवी तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। हेजलवुड को हैमस्ट्रिंग और अकिलीज इन्जुरी के साथ फिट रहने में लगातार परेशानी रही, और टीम चिकित्सा विभाग ने फैसला किया कि तेज़ गेंदबाज को जोखिम उठाकर खेलने नहीं भेजा जाएगा। उनके न लौट पाने के कारण ऑस्ट्रेलिया की पेस विभाग को गंभीर नुकसान हुआ है, खासकर जब पहले ही पैट कमिंस चोट के कारण बाहर हैं और मिचेल स्टार्क ने T20 क्रिकेट से संन्यास ले लिया है।
आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड चोट के कारण टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर हो गए हैं। वे हमस्ट्रिंग इंजरी से अब तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने इसकी पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि हेजलवुड की जगह फिलहाल टीम में किसी भी खिलाड़ी को शामिल नहीं किया जाएगा।
टूर्नामेंट की शुरुआत 7 फरवरी से होगी। ऑस्ट्रेलियाई टीम अपना पहला मुकाबला 11 फरवरी को आयरलैंड के खिलाफ आर प्रेमादासा क्रिकेट स्टेडियम में खेलेगी।
ऑस्ट्रेलिया का स्क्वॉड मिचेल मार्श (कप्तान), ट्रैविस हेड, मार्कस स्टोयनिश, ग्लेन मैक्सवेल, कैमरन ग्रीन, मैथ्यू रैनशॉ, कूपर कॉनोली, टिम डेविड, जोश इंग्लिस, बेन ड्वारशुइस, जेवियर बार्टलेट, नाथन एलिस, मैथ्यू कुह्नेमन और एडम जम्पा।
11 फरवरी को पहला मैच खेलेगी टीम ऑस्ट्रेलिया ग्रुप बी में शामिल है, जहां उसके साथ श्रीलंका, जिम्बाब्वे, ओमान और आयरलैंड की टीमें हैं। टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलियाई टीम का पहला मुकाबला 11 फरवरी को आयरलैंड के खिलाफ आर प्रेमादासा क्रिकेट स्टेडियम में है।
अपने ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया सबसे मजबूत टीम है, लेकिन उसे श्रीलंका और आयरलैंड से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया का श्रीलंका के साथ 16 फरवरी को मुकाबला होगा। टीम अपना आखिरी लीग मैच 20 फरवरी को ओमान के खिलाफ खेलेगी। उससे पहले उसे 13 फरवरी को जिम्बाब्वे से भी भिड़ना है।
हेजलवुड की अनुपस्थिति एक बड़ा ‘ब्लो’ मानी जा रही है क्योंकि वे तेज और सटीक लाइन-लेंथ वाली गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं और पिछले कुछ सीज़न में उन्होंने T20 क्रिकेट में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। हालांकि टीम ने कुछ अन्य पेस बॉलर्स को अपनी तरफ से मजबूत विकल्प के रूप में रखा है, लेकिन हेजलवुड जैसे अनुभवी खिलाड़ी का अभाव निश्चित ही महसूस किया जाएगा। इससे ऑस्ट्रेलियाई टीम को रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है और स्पिन तथा अन्य तेज़ गेंदबाज़ों पर अधिक भरोसा करना पड़ सकता है।


















