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नई दिल्ली, डे-नाइट टेस्ट हमेशा से एशेज सीरीज का वह अध्याय रहा है, जिसमें रणनीति, अनुशासन और गुलाबी गेंद की अनpredictability एक साथ मिलकर मुकाबले को बेहद रोमांचक बना देती है। मौजूदा टेस्ट में भी ठीक यही देखने को मिला, जहां ऑस्ट्रेलियाई टीम ने मैच के तीसरे ही सेशन तक ऐसी पकड़ बना ली, जिसे कमजोर करना इंग्लैंड के लिए चुनौती से कम नहीं दिख रहा। एडिलेड की गुलाबी गेंद वाली थिएटर-लाइट्स में ऑस्ट्रेलियाई बॉलर्स ने शुरुआती overs में जिस तीखेपन के साथ लाइन और लेंथ को नियंत्रित किया, उसने इंग्लैंड को बैकफुट पर धकेल दिया।

द एशेज सीरीज के दूसरे मैच में शुक्रवार को डे-नाइट टेस्ट इतिहास में एक दिन में सबसे ज्यादा रन का रिकॉर्ड बना। दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 6 विकेट पर 378 रन बना लिए। टीम ने इंग्लैंड पर 44 रन की बढ़त हासिल कर ली। मेजबान टीम से 3 बल्लेबाजों ने अर्धशतक लगाए, जिनमें जेक वेदरल्ड 72 रन के साथ टॉप स्कोरर रहे।

इससे पहले इंग्लैंड ने 325/9 से पारी आगे बढ़ाई, लेकिन टीम सिर्फ 9 रन और जोड़ सकी। आखिरी विकेट जोफ्रा आर्चर के रूप में गिरा और इंग्लैंड की पारी 334 रन पर खत्म हुई। जो रूट 138* बनाकर नॉट आउट रहे। ऑस्ट्रेलिया की ओर से मिचेल स्टार्क ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट झटके।

इंग्लिश बल्लेबाजों की दिक्कत साफ थी—गेंद हवा में भी मूव हो रही थी और पिच से भी कुछ अतिरिक्त गति व सीम मूवमेंट मिल रहा था। ऐसे हालात में उनकी तकनीक और धैर्य दोनों की परीक्षा हुई। ऑस्ट्रेलिया को मिली शुरुआती सफलता ने टीम का उत्साह बढ़ाया, और कप्तान ने आक्रामक फील्ड प्लेसमेंट के साथ इंग्लैंड के शॉट-मेकर्स पर लगातार दबाव बनाए रखा।

आस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने पहली पारी में जो संतुलित और योजनाबद्ध प्रदर्शन किया, वह इंग्लैंड की तुलना में निर्णायक साबित हुआ। उनकी ओपनिंग पार्टनरशिप ने जो स्थिरता दी, उसकी बदौलत बीच के overs में मिडिल ऑर्डर को खुलकर खेलने का मौका मिला। ऑस्ट्रेलिया की बढ़त इतनी मजबूत हो चुकी है कि दूसरी पारी में इंग्लैंड का लक्ष्य केवल रन बनाने का नहीं, बल्कि मैच को पांचवें दिन तक लेकर जाने का होगा।

गुलाबी गेंद के साथ शाम के समय खेलना किसी भी टीम के लिए जोखिम भरा होता है, और ऑस्ट्रेलिया ने इस सेशन का भरपूर फायदा उठाया—चाहे वह तेज गेंदबाजों के सटीक बाउंसर हों या स्पिनर द्वारा डाले गए रणनीतिक ओवर्स, सबने मिलकर इंग्लैंड पर शिकंजा बनाया।

अब इंग्लैंड के सामने दो ही रास्ते हैं—या तो वे बल्लेबाजी में धैर्य दिखाकर लंबी पार्टनरशिप्स बनाएं अथवा तेज़ खेलने की कोशिश में और विकेट गंवाने का जोखिम लें। मैच की स्थिति को देखते हुए परिणाम ऑस्ट्रेलिया की ओर झुक चुका है, और उनकी पकड़ हर सेशन के साथ और मजबूत दिख रही है।