नई दिल्ली – भारतीय क्रिकेट टीम के ‘सिक्सर किंग’ युवराज सिंह ने हाल ही में युवा बल्लेबाज शुभमन गिल की कप्तानी की जमकर तारीफ की है। युवराज का मानना है कि गिल में न केवल बेहतरीन बल्लेबाज बनने की क्षमता है, बल्कि वह एक सफल और शांत स्वभाव वाले कप्तान भी साबित हो सकते हैं।
युवराज ने कहा कि शुभमन गिल मैदान पर बेहद धैर्यवान और रणनीतिक सोच रखने वाले खिलाड़ी हैं। वह अपने खिलाड़ियों के साथ अच्छा तालमेल बनाकर चलते हैं और दबाव की स्थिति में भी संयम बनाए रखते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गिल का खेल के प्रति समर्पण और फिटनेस पर ध्यान आने वाले समय में उन्हें टीम इंडिया का एक मजबूत नेता बना सकता है।
शुभमन गिल, जिन्होंने हाल ही में घरेलू टूर्नामेंट और अंतरराष्ट्रीय सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया, टीम के युवा खिलाड़ियों के बीच एक प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी कप्तानी में कई मौकों पर टीम ने कठिन परिस्थितियों में जीत हासिल की, जिससे उनका नेतृत्व कौशल और निखरकर सामने आया है।
युवराज सिंह का यह बयान क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। कई पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि गिल आने वाले वर्षों में न केवल टीम इंडिया के लिए एक अहम बल्लेबाज रहेंगे, बल्कि उनकी कप्तानी का अंदाज भी भारतीय क्रिकेट को नई दिशा दे सकता है।
एंडरसन-तेंदुलकर टेस्ट सीरीज के में शुभमन गिल ने चार शतक बनाए. और 754 रन के साथ शीर्ष स्कोरर रहे. इस उपलब्धि ने उन्हें सेना (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) देश में टेस्ट सीरीज में 700 से अधिक रन बनाने वाला पहला एशियाई बल्लेबाज बना दिया और इस प्रदर्शन ने मेहमान टीम को पांच टेस्ट मैचों की सीरीज 2-2 से ड्रॉ कराने में मदद की. भारत के तीन दिग्गज विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन के लंबे प्रारूप के क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद 25 वर्षीय गिल ने इस मुश्किल दौरे पर युवा टेस्ट टीम का नेतृत्व किया.
युवराज ने महिला क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेंट के 50 दिन की उलटी गिनती पर आयोजित ‘50 डेज टू गो’ कार्यक्रम के इतर आईसीसी डिजिटल से कहा, ‘उनके विदेशी रिकॉर्ड पर कई सवालिया निशान थे. वह (गिल) कप्तान बने और चार टेस्ट शतक जड़े. यह अविश्वसनीय है कि जब आपको जिम्मेदारी दी जाती है तो आप उसे कैसे लेते हैं. इसलिए मुझे उन पर (भारतीय टीम पर) बहुत गर्व है. मुझे निश्चित रूप से लगता है कि यह हमारी जीत है, हालांकि यह सीरीज ड्रॉ रही क्योंकि यह युवा टीम है. और इंग्लैंड में जाकर खेलना और खुद को साबित करना आसान नहीं है.’

















