नई दिल्ली । इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा सुझाए गए दो-स्तरीय वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के प्रारूप का कड़ा विरोध किया है। ECB ने स्पष्ट किया है कि इस तरह का ढांचा न सिर्फ टेस्ट क्रिकेट की आत्मा के खिलाफ है, बल्कि इससे छोटे और विकासशील क्रिकेट राष्ट्रों के हितों को भी नुकसान पहुंचेगा।
प्रस्ताव का मूल स्वरूप:
ICC में कुछ सदस्य देशों ने यह प्रस्ताव रखा था कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप को दो डिवीज़न में बांटा जाए –
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डिवीजन 1: शीर्ष 6-8 टीमें
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डिवीजन 2: बाकी टीमें, जिन्हें प्रमोशन-रिग्रेशन के आधार पर आगे बढ़ने का मौका मिलेगा
इस मॉडल का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले मुकाबलों को प्राथमिकता देना और दर्शकों की रुचि बनाए रखना बताया गया था।
ECB का विरोध:
ECB ने इस प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
“टेस्ट क्रिकेट को ‘एलिट बनाम अन्य’ में नहीं बांटा जा सकता। इससे खेल की व्यापकता, समावेशिता और विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा।”
ECB का मानना है कि यह मॉडल छोटे क्रिकेट देशों को टेस्ट प्रारूप से बाहर कर देगा, जिससे खेल का वैश्विक विकास रुक जाएगा।
मुख्य तर्क ECB की ओर से:
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समान अवसर की भावना: सभी टेस्ट-स्टेटस टीमों को एकसमान मंच मिलना चाहिए।
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इतिहास और परंपरा की रक्षा: टेस्ट क्रिकेट का गौरवशाली इतिहास सबको साथ लेकर चलने का है।
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नए प्रतिभाओं को अवसर: अगर द्वितीय डिवीजन कम चर्चित होगा, तो उभरते खिलाड़ियों को बड़ा मंच नहीं मिल पाएगा।
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आर्थिक विषमता: डिवीजन-2 में रहने वाली टीमों को कम प्रसारण अधिकार, प्रायोजन और व्यावसायिक लाभ मिलेगा।
अन्य बोर्डों की प्रतिक्रियाएं:
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भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे बड़े बोर्डों का मिश्रित रुख सामने आया है।
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कुछ छोटे देशों जैसे जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज, आयरलैंड आदि ने भी इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है।
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ICC में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है, और अंतिम फैसला अब भी लंबित है।
पृष्ठभूमि:
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2019 से शुरू हुई थी, जिसमें सभी टीमों को पॉइंट्स के आधार पर रैंक किया जाता है और टॉप-2 टीमें फाइनल में पहुंचती हैं। अब तक 2 संस्करण हो चुके हैं –
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2021: न्यूजीलैंड चैंपियन
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2023: ऑस्ट्रेलिया चैंपियन
नए प्रस्ताव का उद्देश्य ज्यादा प्रतिस्पर्धा और मनोरंजन प्रदान करना बताया जा रहा है, लेकिन इससे खेल के पारंपरिक स्वरूप को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
ECB का यह रुख दर्शाता है कि टेस्ट क्रिकेट अभी भी केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उसकी परंपरा और व्यापकता के आधार पर ही विकसित किया जाना चाहिए। दो-स्तरीय प्रणाली से छोटे देशों का मनोबल टूट सकता है और खेल के विकास में असंतुलन आ सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ICC इस विवादास्पद प्रस्ताव पर क्या अंतिम निर्णय लेती है – समावेशिता को तरजीह या वाणिज्यिक मजबूरी को।
















