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नई दिल्ली । करीब तीन हफ्ते तक चले विवाद के बाद ECB और BCCI ने गुरुवार को तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी लॉन्च कर दी। इसी के साथ पटौदी ट्रॉफी को अधिकृत रूप से रिटायरकर दिया गया। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड ने पटौदी परिवार के सम्मान में पटौदी मेडल देने का फैसला लिया है, जो इस सीरीज के विजेता कप्तान को दी जाएगी। 14 जून को अहमदाबाद प्लेन हादसे के बाद अनावरण स्थगित कर दिया गया था।

इस मौके पर दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने कहा- ‘मुझे खुशी है कि उनके (टाइगर पटौदी) के सम्मान में एक पदक देने का फैसला किया गया है।’ पटौदी ट्रॉफी के रिटायरमेंट पर विवाद हो गया था। ऐसे में तेंदुलकर ने पटौदी की विरासत को कायम रखने की पहल की।

इस बार भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के विजेता को एक नई ट्रॉफी दी जाएगी, जो सचिन तेंदुलकर और जेम्स एंडरसन के नाम पर होगी। यह दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के सम्मान में एक नई पहल है।

तेंदुलकर-एंडरसन के नाम क्यों रखा गया नाम सचिन तेंदुलकर के नाम सबसे ज्यादा 200 टेस्ट मैच खेलना और सबसे ज्यादा 15,921 टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड है। वहीं, जेम्स एंडरसन ने पिछले साल में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। एंडरसन दूसरे सबसे ज्यादा 188 टेस्ट मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं। वे टेस्ट में तीसरे सबसे ज्यादा 704 विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।

2007 में 75 साल पूरे होने पर पटौदी ट्रॉफी नाम दिया था पटौदी ट्रॉफी 2007 में भारत के 1932 में अपने पहले टेस्ट की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिए अस्तित्व में आई थी। 21 साल की उम्र में पटौदी सबसे कम उम्र के भारतीय टेस्ट कप्तान बने थे। उनके पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी ने इंग्लैंड और भारत दोनों का प्रतिनिधित्व किया था।

लीड्स में 20 जून को खेला जाएगा पहला टेस्ट भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैच खेले जाएंगे। पहला टेस्ट 20 जून से लीड्स में शुरू होगा। अंतिम टेस्ट 31 जुलाई से लंदन के द ओवल में खेला जाएगा। भारत 2007 के बाद इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज नहीं जीत सका है। ऐसे में टीम की नजर सीरीज जीतने पर होगी।