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नई दिल्ली, भारतीय टीम को विदेशी दौरे पर खेले गए अहम मुकाबले में 41 रन से हार का सामना करना पड़ा, हालांकि इस मैच में विराट कोहली ने शानदार शतक जड़कर एक बार फिर अपनी क्लास साबित कर दी। कोहली की यह शतकीय पारी भारत के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण रही, लेकिन टीम का बाकी बल्लेबाजी क्रम दबाव में बिखर गया, जिसका खामियाजा हार के रूप में भुगतना पड़ा।

न्यूजीलैंड ने भारत में पहली बार वनडे सीरीज जीत ली है। टीम ने रविवार को इंदौर में खेले गए तीसरे वनडे मैच में मेजबानों को 41 रन से हराया। इतना ही नहीं, भारतीय टीम होलकर स्टेडियम में पहला मैच हारी है।

338 रन का टारगेट चेज कर रही भारतीय टीम 46 ओवर में 296 रन पर ऑलआउट हो गई। विराट कोहली ने 108 बॉल पर 124 रन की शतकीय पारी खेली, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके।

न्यूजीलैंड की ओर से क्रिस्टियन क्लार्क और जैक फॉल्क्स 3-3 विकेट झटके। डेरिल मिचेल ने 137 और ग्लेन फिलिप्स ने 106 रनों की शतकीय पारियां खेलीं। दोनों ने 219 रन की साझेदारी भी की।

कोहली की जुझारू पारी बनी आकर्षण का केंद्र
लक्ष्य का पीछा करते हुए जब भारतीय टीम शुरुआती झटकों से जूझ रही थी, तब विराट कोहली ने एक छोर संभाल लिया। उन्होंने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए शतक पूरा किया। कठिन परिस्थितियों में खेली गई यह पारी एक बार फिर साबित करती है कि बड़े मैचों में कोहली पर भरोसा क्यों किया जाता है। उन्होंने स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ रन बटोरे।

टीम इंडिया की बल्लेबाजी रही कमजोर कड़ी
कोहली के अलावा भारतीय बल्लेबाज विपक्षी गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सके। मिडिल ऑर्डर में लगातार विकेट गिरने से रन रेट का दबाव बढ़ता गया। निचले क्रम से भी अपेक्षित योगदान नहीं मिल पाया, जिसके चलते भारत लक्ष्य के करीब पहुंचने के बावजूद 41 रन पीछे रह गया।

गेंदबाजी में भी दिखी कमी
मैच के पहले हिस्से में भारतीय गेंदबाज विपक्षी टीम को बड़ा स्कोर बनाने से रोकने में नाकाम रहे। डेथ ओवर्स में दिए गए अतिरिक्त रन अंततः भारत के लिए भारी पड़ गए। हालांकि कुछ गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में संघर्ष जरूर दिखाया, लेकिन कुल मिलाकर गेंदबाजी अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।

हार के बावजूद कोहली का रिकॉर्ड चर्चा में
इस शतक के साथ विराट कोहली ने दौरे पर अपनी शानदार फॉर्म का परिचय दिया। यह पारी न सिर्फ आंकड़ों में अहम रही, बल्कि टीम के लिए एक सकारात्मक संकेत भी मानी जा रही है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अन्य बल्लेबाज कोहली का साथ निभाते, तो नतीजा अलग हो सकता था।