नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेट में अगर किसी एक बल्लेबाजी पोज़िशन ने सबसे ज़्यादा भरोसा दिलाया है, तो वह है नंबर-3—और इस स्लॉट को दशकों तक परिभाषित करने का काम विराट कोहली ने किया है। ओपनिंग के बाद नई गेंद का सामना, फील्डिंग पावरप्ले का प्रबंधन और पारी को बड़े स्कोर में बदलने की जिम्मेदारी—कोहली ने हर चुनौती को रिकॉर्ड्स में बदला।
नंबर-3 पर हाईएस्ट रन बनाकर कोहली ने न सिर्फ भारतीय बल्कि विश्व क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। यह पोज़िशन उनकी तकनीक, टेम्परामेंट और रन-मेकिंग की भूख के लिए बिल्कुल फिट बैठी—यहीं से उनके कई ऐतिहासिक शतक और मैच-विनिंग पारियां निकलीं।
न्यूजीलैंड ने भारत में इतिहास रचते हुए पहली बार वनडे सीरीज अपने नाम कर ली। इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए तीसरे वनडे में कीवी टीम ने भारत को 41 रन से हराया। इसके साथ ही यह भारत की इस मैदान पर पहली वनडे हार भी रही।
रविवार को रिकार्ड्स का दिन विराट कोहली के नाम रहा। वे वनडे में नंबर-3 पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने और न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। लेकिन उनकी पारी टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सकी।
338 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 46 ओवर में 296 रन पर ऑलआउट हो गई। इससे पहले टॉस हारकर बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 8 विकेट पर 337 रन बनाए थे। डेरिल मिचेल ने 137 और ग्लेन फिलिप्स ने 106 रन की शतकीय पारियां खेलीं।
नंबर-3 पर कोहली क्यों बने सबसे भरोसेमंद?
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टेक्निकल परफेक्शन: नई गेंद को खेलना हो या स्पिन के खिलाफ पारी आगे बढ़ानी हो—कोहली का फुटवर्क और शॉट सिलेक्शन उन्हें अलग बनाता है।
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गेम अवेयरनेस: रन-रेट, विकेटों की स्थिति और गेंदबाज़ी योजनाओं को पढ़ने की क्षमता।
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कंसिस्टेंसी: साल-दर-साल औसत और स्ट्राइक-रेट का संतुलन—बड़े मैचों में बड़े रन।
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प्रेशर हैंडलिंग: चेज़ में पारी को एंकर करना और ज़रूरत पड़ने पर गियर बदलना।
रिकॉर्ड्स की झड़ी
नंबर-3 पर खेलते हुए कोहली ने वनडे और टी20 में ऐसे रन जोड़े जो उन्हें इस पोज़िशन का ऑल-टाइम रन-लीडर बनाते हैं। उनके नाम दर्ज हैं:
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कई हाईएस्ट एग्रीगेट सीज़न
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निर्णायक मैचों में मैच-विनिंग शतक
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बड़े टूर्नामेंट्स में लगातार रन-स्कोरिंग
टीम इंडिया पर प्रभाव
नंबर-3 पर कोहली की मौजूदगी से:
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ओपनर्स को आक्रामक शुरुआत की आज़ादी मिलती है।
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मिडिल ऑर्डर को स्थिरता और समय मिलता है।
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रन-चेज़ में टीम का आत्मविश्वास बढ़ता है।
विरासत और आगे का रास्ता
कोहली ने नंबर-3 को सिर्फ एक पोज़िशन नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार बना दिया। युवा बल्लेबाज़ों के लिए यह एक ब्लूप्रिंट है—कैसे तकनीक, फिटनेस और मानसिक मज़बूती से लंबे समय तक शीर्ष पर रहा जाए।
नंबर-3 पर विराट कोहली का हाईएस्ट रन रिकॉर्ड उनकी महानता का प्रमाण है। यह रिकॉर्ड सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि भरोसे, निरंतरता और बड़े मौकों पर चमकने की आदत का प्रतीक है।















