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नई दिल्ली, भारत के खेल जगत को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग महिला शूटर ने अपने ही नेशनल कोच पर बलात्कार का आरोप लगाया है। आरोप सामने आने के बाद खेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और शुरुआती जांच के आधार पर आरोपी कोच को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, बल्कि खेलों में खिलाड़ियों की सुरक्षा और भरोसे पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

पीड़िता के अनुसार, कोच ने प्रशिक्षण के दौरान अपने पद और भरोसे का गलत इस्तेमाल किया। उसने बताया कि लंबे समय से उसे मानसिक दबाव में रखा जा रहा था और विरोध करने पर करियर बर्बाद करने की धमकी दी जाती थी। आखिरकार, हिम्मत जुटाकर नाबालिग खिलाड़ी ने परिजनों को पूरी घटना बताई, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

पुलिस ने मामले को POCSO एक्ट के तहत दर्ज किया है, क्योंकि पीड़िता नाबालिग है। प्राथमिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए संबंधित खेल संघ ने आरोपी कोच को सस्पेंड कर दिया और सभी आधिकारिक गतिविधियों से दूर कर दिया गया है। साथ ही, मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए एक आंतरिक समिति भी गठित की गई है।

खेल मंत्रालय ने भी इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय का कहना है कि खिलाड़ियों, विशेषकर नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषी पाए जाने पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कई पूर्व खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों ने इस घटना की निंदा करते हुए सिस्टम में सुधार की मांग की है।

यह मामला एक बार फिर बताता है कि खेल अकादमियों और प्रशिक्षण शिविरों में सुरक्षा तंत्र, शिकायत निवारण प्रणाली और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की सख्त जरूरत है। खिलाड़ियों को ऐसा सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, जहां वे बिना डर के अपनी प्रतिभा निखार सकें और किसी भी तरह के शोषण के खिलाफ आवाज उठा सकें।

फिलहाल आरोपी कोच से पूछताछ जारी है और पुलिस तकनीकी व बयान आधारित सबूत जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। देश की नजर इस मामले पर टिकी है और सभी को उम्मीद है कि पीड़िता को न्याय मिलेगा और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।