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नई दिल्ली एशेज क्रिकेट के लंबे और गौरवशाली इतिहास में पहली बार ऐसा ऐतिहासिक कारनामा देखने को मिला है, जब किसी एक पारी में सात अलग-अलग 50 से अधिक रन की साझेदारियां दर्ज की गईं। इस उपलब्धि ने न केवल रिकॉर्ड बुक को हिला दिया, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में टीम वर्क, धैर्य और रणनीतिक बल्लेबाजी की अहमियत को भी रेखांकित किया।

सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में खेले जा रहे पांचवें और आखिरी टेस्ट के चौथे दिन बुधवार को ऑस्ट्रेलिया की टीम पहली पारी में 567 रन पर ऑलआउट हो गई। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी के आधार पर 183 रन की बढ़त हासिल की। इससे पहले इंग्लैंड की टीम अपनी पहली पारी में 384 रन पर सिमट गई थी।

दिन का खेल समाप्त होने तक इंग्लैंड ने दूसरी पारी में 8 विकेट के नुकसान पर 302 रन बना लिए हैं और कुल बढ़त 119 रन की हो गई। जैकब बेथेल 142 रन बनाकर नाबाद लौटे। मुकाबले का पांचवां और आखिरी दिन गुरुवार को सुबह 5 बजे शुरू होगा।

ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी के दौरान सात 50 रन से अधिक की साझेदारियां हुईं, जो एशेज इतिहास में पहली बार देखने को मिला।

स्मिथ ने 138 रन बनाए चौथे दिन का खेलने शुरू होने पर ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 518/7 था। स्टीव स्मिथ (129) और ब्यू वेबस्टर (42) ने पारी को आगे बढ़ाया। मेजबान टीम स्कोर में 49 रन और जोड़कर पहली पारी में 567 रन पर ऑल आउट हो गई। इससे उसे 183 रन की बढ़त मिली। ऑस्ट्रेलिया के लिए कप्तान स्टीव स्मिथ ने 220 गेंदों में 138 रन बनाए, जिसमें 16 चौके और एक छक्का शामिल रहा। ब्यू वेबस्टर ने 87 गेंदों में 71 रन बनाए, जिसमें सात चौके शामिल थे। ट्रेविस हेड ने सबसे ज्यादा 163 रन बनाए।

इस पारी की खास बात यह रही कि साझेदारियां अलग-अलग परिस्थितियों में बनीं—नई गेंद के खिलाफ, स्पिन के दौर में और रिवर्स स्विंग के समय भी। इससे यह साफ हुआ कि बल्लेबाजों ने हालात को पढ़कर अपनी रणनीति बदली और धैर्य के साथ रन जोड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड एशेज सीरीज की दिशा और दशा तय करने वाला साबित हो सकता है। इतनी मजबूत साझेदारियों के कारण न सिर्फ बड़ा स्कोर खड़ा हुआ, बल्कि विपक्षी टीम पर मानसिक दबाव भी बना। गेंदबाज लंबे स्पेल डालने को मजबूर हुए और फील्डिंग साइड की ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती चली गई।

एशेज जैसे प्रतिष्ठित मुकाबले में इस तरह का रिकॉर्ड बनना टेस्ट क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार पल है। यह पारी आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बनेगी कि कैसे साझेदारी, संयम और टीम भावना के दम पर इतिहास रचा जा सकता है।