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नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने खेल प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट को आंशिक रूप से लागू कर दिया है। लंबे समय से खेल संघों में सुधार, सुशासन और खिलाड़ियों के हितों की सुरक्षा को लेकर उठती मांगों के बीच यह फैसला अहम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य चरणबद्ध तरीके से सुधारों को लागू करना है, ताकि खेल तंत्र में स्थायी और प्रभावी बदलाव लाया जा सके।

देश में खेल प्रशासन से जुड़ा नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट गुरुवार से आंशिक रूप से लागू हो गया है। इसके तहत केंद्र सरकार ने उन प्रावधानों को लागू कर दिया है, जिनसे नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (NSB) और नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल (NST) के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

यह कानून पिछले साल 18 अगस्त को अधिसूचित किया गया था और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा खेल सुधार बताया था।

इस बिल को 23 जुलाई को लोकसभा में पेश किया गया और 11 अगस्त को इसे वहां पारित कर दिया गया। इससे एक दिन बाद राज्यसभा ने दो घंटे से ज्यादा समय तक चली चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया था।

नेशनल स्पोर्ट्स बिल को लाने की शुरुआत 1975 से हुई थी। लेकिन हर बार राजनीतिक कारणों के चलते यह बिल कभी संसद नहीं जा पाया था।

सरकार का कहना है कि यह कानून खिलाड़ियों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। नए प्रावधानों से खिलाड़ियों की शिकायतों के समाधान के लिए स्पष्ट तंत्र बनेगा और चयन, प्रशिक्षण व संसाधनों के वितरण में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, खेल महासंघों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे भारत की वैश्विक खेल छवि भी मजबूत होगी।

हालांकि, कुछ खेल संगठनों ने इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। जहां कई विशेषज्ञ और खिलाड़ी इसे लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार मान रहे हैं, वहीं कुछ महासंघों का कहना है कि सभी प्रावधानों को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध व्यवस्था से स्पष्टता की कमी हो सकती है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि सभी हितधारकों से संवाद कर आगे के चरणों में कानून को पूरी तरह लागू किया जाएगा।

कुल मिलाकर, नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट का आंशिक लागू होना भारतीय खेल प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल प्रशासनिक सुधार लाएगा, बल्कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन, भरोसे और खेल संस्कृति को भी नई दिशा देगा।