भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह क्रिकेट नहीं बल्कि कानूनी कार्रवाई है। गांगुली ने अर्जेंटीना फैन क्लब के एक प्रेसिडेंट के खिलाफ मानहानि (डिफेमेशन) का मामला दर्ज कराया है। यह केस उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से लगाए गए कथित अपमानजनक और झूठे आरोपों को लेकर किया गया है।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अर्जेंटीना फैन क्लब के प्रेसिडेंट ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सौरव गांगुली को लेकर ऐसे बयान दिए, जिन्हें गांगुली और उनकी कानूनी टीम ने पूरी तरह निराधार, भ्रामक और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। इन बयानों के सामने आने के बाद गांगुली ने पहले कानूनी नोटिस भिजवाया, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने अदालत का रुख करने का फैसला किया।
उत्तम साहा ने दावा किया था- ‘गांगुली ने इवेंट के मुख्य आयोजक सताद्रु दत्ता के कामकाज में ‘मिडिलमैन’ की भूमिका निभाई थी। इसी आरोप पर गांगुली की कानूनी टीम ने साहा को नोटिस भेजा है और बयान वापस लेने व हर्जाने की मांग की है। 53 साल के गांगुली क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के प्रेसिडेंट हैं।
गांगुली ने साफ किया कि वे मेसी के इवेंट में सिर्फ एक मेहमान के तौर पर शामिल हुए थे। उनका आयोजन से कोई आधिकारिक या प्रबंधन से जुड़ा रोल नहीं था। गांगुली ने अपनी शिकायत में कहा- ‘बिना किसी तथ्य के सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।’
बंगाल के स्पोर्ट्स मिनिस्टर ने इस्तीफा दिया था दो दिन पहले मंगलवार 16 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने मेसी के इवेंट में तोड़फोड़ और अव्यवस्था के बाद इस्तीफा दे दिया था। TMC सांसद कुनाल घोष ने फेसबुक पोस्ट में बताया था कि बिस्वास ने CM ममता बनर्जी से खुद को खेल मंत्री के दायित्व से मुक्त करने का अनुरोध किया।
इस पूरे घटनाक्रम पर सौरव गांगुली की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह अपनी छवि और सम्मान के सवाल पर कोई समझौता नहीं करना चाहते। गांगुली इससे पहले भी साफ कर चुके हैं कि आलोचना और गलत आरोपों के बीच फर्क होता है, और जब बात झूठ और बदनामी की हो, तो कानून का सहारा लेना जरूरी हो जाता है।
यह मामला आने वाले समय में और चर्चा में रह सकता है, क्योंकि इसमें खेल, सोशल मीडिया और कानून—तीनों पहलू जुड़े हुए हैं। अब सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई और इस केस की आगे की दिशा पर टिकी हैं।

















