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नई दिल्ली, भारतीय खेल जगत के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है। अंतरराष्ट्रीय डोपिंग निगरानी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार भारत डोपिंग मामलों में लगातार तीसरी बार शीर्ष स्थान पर रहा है। यह स्थिति न केवल खिलाड़ियों की छवि पर सवाल खड़े करती है, बल्कि देश की खेल प्रणाली और जागरूकता प्रयासों पर भी गंभीर बहस को जन्म देती है।

वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत 2024 में लगातार तीसरी बार डोपिंग मामलों में दुनिया में पहले नंबर पर रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2024 में भारतीय खिलाड़ियों के 260 सैंपल डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए, जो किसी भी देश से सबसे ज्यादा हैं।

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलिंपिक की मेजबानी के लिए भी दावेदारी पेश कर चुका है। इसी साल जुलाई में जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल लॉजेन गया था, तब इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (IOC) ने भारत में डोपिंग की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई थी।

नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने 2024 में कुल 7,113 डोपिंग टेस्ट किए। इनमें 6,576 यूरिन और 537 ब्लड सैंपल शामिल थे। इन टेस्ट में 260 मामले पॉजिटिव निकले, यानी डोपिंग की दर 3.6% रही। जिन देशों में 5,000 से ज्यादा टेस्ट हुए, उनमें यह सबसे ज्यादा पॉजिटिविटी रेट है।

भारतीय खेल प्राधिकरण और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसियों ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है कि डोपिंग के खिलाफ जागरूकता अभियान और सख्त निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि कई मामलों में खिलाड़ी अनजाने में प्रतिबंधित दवाओं या सप्लीमेंट्स का सेवन कर लेते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें प्रतिबंध के रूप में भुगतना पड़ता है।

खेल विशेषज्ञों का कहना है कि डोपिंग से न केवल खिलाड़ी का करियर खत्म हो सकता है, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय साख को भी नुकसान पहुंचता है। ओलंपिक और विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में भारत की बढ़ती मौजूदगी के बीच इस तरह के आंकड़े चिंताजनक माने जा रहे हैं।

अब जरूरत इस बात की है कि खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ को डोपिंग नियमों की स्पष्ट जानकारी दी जाए और सप्लीमेंट्स के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जाए। माना जा रहा है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भारत को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।