नई दिल्ली, पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर के पर्सनालिटी राइट्स से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति की पहचान, नाम, तस्वीर, आवाज या लोकप्रियता का व्यावसायिक इस्तेमाल बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता। यह आदेश सेलिब्रिटी राइट्स और बौद्धिक संपदा कानून के क्षेत्र में एक अहम मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनील गावस्कर की याचिका पर आदेश दिया है। यह मामला पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा से जुड़ा है। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सात दिन में कार्रवाई करने को कहा है। न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने गावस्कर के वकील से बात की। उन्होंने कहा- वकील पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से संपर्क करें।
अदालत ने प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे गावस्कर के मुकदमे को IT एक्ट 2021 के तहत शिकायत मानकर जरूरी कदम उठाएं। यह कानून सोशल मीडिया गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया आचार संहिता से जुड़ा है।
एक दिन पहले अभिनेता सलमान खान और तेलुगु स्टार जूनियर एनटीआर भी अपने पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे थे।
अदालत ने गावस्कर (वादी) को निर्देश दिया कि वे जिन यूआरएल को हटाने का अनुरोध कर रहे हैं, उन्हें 24 घंटे में सोशल मीडिया मीडियम को उपलब्ध कराएं।
क्या है पूरा मामला? गावस्कर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म और ई-कॉमर्स वेबसाइट द्वारा उनके नाम, तस्वीरें और शख्सियत एवं पहचान के अनधिकृत उपयोग को रोकने तथा पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था।
पर्सनालिटी राइट्स के तहत किसी व्यक्ति को अपनी तस्वीर, नाम या पहचान की सुरक्षा, उन पर नियंत्रण रखने और उनके उपयोग से लाभ प्राप्त करने का अधिकार होता है।
इन सेलेब्स के पास हैं पर्सनैलिटी राइट्स ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन से पहले इसी साल मई में एक्टर जैकी श्रॉफ भी कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी इमेज और वीडियो बदलकर बिना इजाजत मर्चेंडाइज बेचा जा रहा है। उस समय कोर्ट ने उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स को भी सुरक्षित किया था।
साल 2023 में कोर्ट ने अनिल कपूर की इमेज, वॉयस और उनके ‘झकास’ कैचफ्रेज का गलत इस्तेमाल रोक दिया था। वहीं, नवंबर 2022 में अमिताभ बच्चन की पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की भी सुरक्षा दी गई थी।
यह केस अब डिजिटल युग में सेलिब्रिटीज की प्राइवेसी और पब्लिसिटी राइट्स को लेकर एक अहम मिसाल साबित हो सकता है। अदालत की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि क्या अदालत तुरंत किसी तरह का अंतरिम आदेश पारित करेगी या नहीं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी सार्वजनिक हस्ती की लोकप्रियता उनकी निजी संपत्ति के समान होती है, जिसे बिना सहमति इस्तेमाल करना कानूनन गलत है। इस मामले में यह भी स्पष्ट किया गया कि विज्ञापन, प्रमोशनल कंटेंट, डिजिटल प्लेटफॉर्म या किसी अन्य माध्यम से यदि किसी सेलिब्रिटी की पहचान का लाभ उठाया जाता है, तो वह पर्सनालिटी राइट्स के उल्लंघन की श्रेणी में आएगा। अदालत ने ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी माना कि आधुनिक डिजिटल युग में सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन और ब्रांड प्रमोशन के जरिए प्रसिद्ध व्यक्तियों की छवि का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा और भी जरूरी हो जाती है। कोर्ट के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की मेहनत से बनी प्रतिष्ठा को व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने से पहले स्पष्ट अनुमति लेना अनिवार्य है।
इस आदेश को न सिर्फ खेल जगत, बल्कि फिल्म, मीडिया और डिजिटल इंडस्ट्री के लिए भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भविष्य में सेलिब्रिटी राइट्स से जुड़े मामलों में एक मजबूत कानूनी आधार मिलेगा और बिना अनुमति किसी की पहचान के इस्तेमाल पर रोक लगेगी। गावस्कर के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि पब्लिक फिगर होने के बावजूद व्यक्तिगत अधिकार कितने महत्वपूर्ण हैं।















