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नई दिल्ली, लगातार तीन हार झेलने के बाद भारतीय टीम पर दबाव था, आलोचनाएँ तेज़ थीं और आत्मविश्वास डगमगाने लगा था। लेकिन जिस अंदाज़ में भारत ने चौथा टी-20 मैच जीतकर वापसी की, उसने यह साबित कर दिया कि यह टीम मुश्किल हालात में भी अपने खेल से मैच पलटने की क्षमता रखती है।

इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 190 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। शुरुआत में ही ओपनर यशस्वी जायसवाल ने धमाकेदार अर्धशतक जड़ा और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपने ट्रेडमार्क स्टाइल में ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करते हुए 38 गेंदों में 62 रन बनाए। मिडिल ऑर्डर में रिंकू सिंह ने शानदार फिनिशिंग करते हुए आख़िरी ओवरों में चौके-छक्कों की बारिश कर दी।

19 अक्टूबर 2025। साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बाद इंग्लैंड ने भी विमेंस वनडे वर्ल्ड कप में भारत को हरा दिया। ट्रॉफी जीतना तो दूर, इंडिया विमेंस का सेमीफाइनल में पहुंचना भी मुश्किल था। साल 2000 की चैंपियन न्यूजीलैंड से मैच होना बाकी था और टीम इंडिया मोमेंटम को पूरी तरह खो चुकी थी।

वहां से आज 31 अक्टूबर का दिन, इंडिया विमेंस ने फाइनल में एंट्री कर ली। एंट्री भी मामूली नहीं, 7 बार की चैंपियन और टूर्नामेंट में अब तक नहीं हारी ऑस्ट्रेलिया को न सिर्फ हराया, बल्कि विमेंस वनडे इतिहास का सबसे बड़ा टारगेट भी चेज किया। इस जीत की इबारत लिखी, भारत की कप्तान हरमनप्रीत कौर और शतक बनाकर नॉटआउट रहीं जेमिमा रोड्रिग्ज ने।

वनडे वर्ल्ड कप की शुरुआत भारत ने गुवाहाटी में श्रीलंका के खिलाफ मैच से की। बरसापारा स्टेडियम में पहले बैटिंग करते हुए भारत ने 269 रन बना दिए। जवाब में श्रीलंका को 211 पर ही समेट दिया। फिफ्टी लगाने के साथ 3 विकेट लेने वालीं दीप्ति शर्मा प्लेयर ऑफ द मैच रहीं।

दूसरे मुकाबले में भारत का सामना चीर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से हुआ। कोलंबो में स्पिन फ्रेंडली पिच थी, जहां पाकिस्तानी स्पिनर्स को फायदा हो सकता था। भारत ने यहां 247 रन बनाए और पाकिस्तान को 159 रन पर ही समेट कर लगातार दूसरा मैच जीत लिया। 3 विकेट लेने वालीं तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ प्लेयर ऑफ द मैच रहीं।

कप्तान सूर्यकुमार यादव ने मैच के बाद कहा, “हमने हार से बहुत कुछ सीखा। टीम ने ठान लिया था कि इस बार कोई मौका हाथ से नहीं जाने देंगे। हर खिलाड़ी ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और नतीजा सामने है।”

इस जीत के साथ भारत ने न सिर्फ़ सीरीज़ में वापसी की बल्कि अपने आत्मविश्वास को भी वापस पाया। अब टीम का ध्यान सीरीज़ के आख़िरी मैच पर है, जहाँ जीत दर्ज कर बराबरी करना उसका लक्ष्य होगा।

भारतीय टीम का यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि निरंतरता और एकजुटता से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। हार की हैट्रिक के बाद मिली यह जीत सिर्फ़ एक मैच नहीं, बल्कि टीम इंडिया की मानसिक मज़बूती की कहानी बन गई।