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नई दिल्ली, भारतीय तीरंदाजी की स्टार ज्योति सुरेखा वेन्नम ने एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने वर्ल्ड कप फाइनल 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के लिए भी गर्व का क्षण है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तीरंदाजी में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

भारतीय तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम ने शनिवार वर्ल्ड कप फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीता। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाज बन गई हैं। नानजिंग में आयोजित इस टूर्नामेंट में ज्योति ने ब्रिटेन की वर्ल्ड नंबर 2 तीरंदाज एला गिब्सन को 150-145 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

वर्ल्ड कप फाइनल में पहली बार मेडल जीता ज्योति ने एला गिब्सन के खिलाफ पांच राउंड में लगातार 15 परफेक्ट 10 स्कोर करके 150-145 से जीत हासिल की। यह ज्योति का वर्ल्ड कप फाइनल में पहला मेडल है। इससे पहले वह 2022 (त्लाक्सकाला) और 2023 (हरमोसिलो) में वर्ल्ड कप फाइनल में हिस्सा ले चुकी थीं, लेकिन दोनों बार पहले दौर में बाहर हो गई थीं।

क्वार्टर फाइनल में अमेरिकी तीरंदाज को हराया 29 साल की ज्योति एशियन गेम्स चैंपियन है। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने अमेरिका की एलेक्सिस रुइज को 143-140 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर-1 से हार का सामना करना पड़ा सेमीफाइनल में उनका मुकाबला वर्ल्ड नंबर 1 मेक्सिको की एंड्रिया बेसेरा से हुआ, जहां वह 143-145 से मामूली अंतर से हार गईं। इस मुकाबले में ज्योति ने तीसरे राउंड तक 87-86 से बढ़त बनाई थी, लेकिन बेसेरा ने चौथे राउंड में तीन परफेक्ट 10 स्कोर करके 116-115 से बढ़त ले ली और अंतिम राउंड में 29-28 से जीत हासिल कर फाइनल में जगह बनाई।

धुरा धमंगांवकर पहले ही राउंड में बाहर हो गईं भारत की एक अन्य महिला कंपाउंड तीरंदाज मधुरा धमंगांवकर भी इस टूर्नामेंट में थीं, लेकिन वह पहले दौर में मेक्सिको की मरियाना बर्नाल से 142-145 से हारकर बाहर हो गईं। मेंस कंपाउंड वर्ग में भारत के रिषभ यादव एकमात्र तीरंदाज हैं, जो आज दक्षिण कोरिया के किम जोंघो के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेंगे।

ज्योति सुरेखा वेन्नम का यह ब्रॉन्ज मेडल सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि एक संदेश है — कि भारतीय महिलाएँ अब खेल के हर मंच पर चमक रही हैं। उनके निशाने की यह सटीकता भारत की तीरंदाजी में नई उम्मीदों की उड़ान भर रही है।