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नई दिल्ली, खेल जगत में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं जो सबको चौंका देते हैं और इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाते हैं। ऐसा ही कारनामा किया है 626वीं रैंक वाले खिलाड़ी दक्षिणेश्वर ने, जिन्होंने बड़े दिग्गजों को पछाड़कर अप्रत्याशित जीत दर्ज की। उनकी यह उपलब्धि न केवल खेल की अनिश्चितताओं को दर्शाती है बल्कि यह भी साबित करती है कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर रैंकिंग सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है।

डेविस कप के ग्रुप स्टेज के मुकाबले में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्विट्जरलैंड के खिलाफ पहले दिन 2-0 की बढ़त हासिल कर ली है। रिजर्व प्लेयर दक्षिणेश्वर सुरेश ने शुक्रवार को अपने से ऊंची रैंकिंग वाले जेरोम काइम को सीधे सेटों में 7-6, 6-3 से हराकर भारत को पहली जीत दिलाई। जबकि सुमित नागल ने भी जीत से वापसी की। उन्होंने मार्क-एंड्रिया ह्यूस्लर को 6-3, 7-6 से हराया।

फिलहाल, दक्षिणेश्वर की ATP रैंकिंग 626 और काइम की 155 है। कप्तान रोहित राजपाल ने आर्यन शाह की जगह दक्षिणेश्वर पर भरोसा जताया और इस खिलाड़ी ने उन्हें निराश नहीं किया।

मैच जीतने के लिए एक जीत की जरूरत शुरुआती दो सिंगल्स मुकाबलों में जीत के साथ भारतीय टीम अब यूरोपीय धरती पर एक यादगार डेविस कप जीत के करीब पहुंच गई है। उसे अब होने वाले तीन मैचों में से एक में जीत हासिल करनी होगी। यदि टीम एक मैच जीत लेती है तो यह स्विट्जरलैंड के खिलाफ मैच अपने नाम कर लेगी। भारत ने पिछली बार 1993 में कान्स में किसी यूरोपीय टीम को हराया था, जब लिएंडर पेस और रमेश कृष्णन की अगुआई में टीम ने क्वार्टर फाइनल में फ्रांस को 3-2 से हराया था।

भारत तीन बार रनरअप रहा डेविस कप टेनिस का एक इंटरनेशनल टीम टूर्नामेंट है। इसमें केवल मेंस प्लेयर्स हिस्सा लेते हैं। जिसे टेनिस का वर्ल्ड कपभी कहा जाता है। यह 1900 में अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन की टीमों के बीच शुरू हुआ था, और अब इसमें 150 से ज्यादा देशों की टीमें हिस्सा लेती हैं। यह हर साल खेला जाता है। इसका आयोजन इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन करता है।

भारत तीन बार टूर्नामेंट का रनरअप रहा है। देश ने कुल तीन बार (1966, 1974 और 1987) डेविस कप के फाइनल में जगह बनाई, लेकिन खिताब जीतने से चूक गया।