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नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सट्टेबाजी से जुड़े एक एप के प्रचार में शामिल होने को लेकर नोटिस भेजा है। यह एप कथित रूप से ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी से जुड़ा हुआ है, जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच चल रही है।

इस केस में पहले ही सुरेश रैना, हरभजन सिंह और युवराज सिंह से पूर्व भारतीय क्रिकेटर्स से ED पूछताछ कर चुकी है।

टीम इंडिया के ओपनर रहे शिखर ने पिछले साल इंटरनेशनल क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान किया था। शिखर पहली बार 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे टीम में शामिल हुए थे। 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने आखिरी वनडे खेला था। उसके बाद से उन्हें भारतीय टीम में जगह नहीं मिली थी।

क्या है मामला?

सूत्रों के अनुसार, शिखर धवन ने एक विदेशी सट्टेबाजी एप का प्रचार किया था, जिसे भारत में बैन किए गए ऑनलाइन जुए की श्रेणी में रखा गया है। ईडी का मानना है कि ऐसे प्रचार से न केवल अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा भी इसमें फंस जाते हैं।

क्रिकेट और विवाद का रिश्ता

यह पहला मौका नहीं है जब क्रिकेटरों का नाम सट्टेबाजी और जुए से जुड़े मामलों में सामने आया है। इससे पहले भी कई खिलाड़ी सट्टेबाजी के प्रचार या संपर्क में आने के कारण जांच के घेरे में आ चुके हैं। हालांकि, शिखर धवन जैसे खिलाड़ी का नाम सामने आने से यह मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।

धवन का पक्ष

धवन ने अपने पक्ष में कहा है कि उन्हें इस एप के संचालन की अवैध प्रकृति की जानकारी नहीं थी। वे पूरी तरह से कानून का पालन करने वाले खिलाड़ी हैं और ईडी की जांच में सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका इरादा कभी भी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने का नहीं था।

खेल जगत में प्रतिक्रिया

धवन को नोटिस भेजे जाने के बाद क्रिकेट जगत और खेल प्रेमियों में हलचल है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि खिलाड़ियों को किसी भी ब्रांड या एप का प्रचार करने से पहले उसकी वैधता की जांच जरूर करनी चाहिए, क्योंकि उनकी लोकप्रियता का असर सीधे जनता पर पड़ता है।

ईडी आने वाले दिनों में धवन से पूछताछ कर सकती है और यह भी जांच की जाएगी कि इस एप के प्रचार के लिए उन्हें कितनी राशि का भुगतान किया गया। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि क्या अन्य खिलाड़ी भी इस प्रचार में शामिल थे।