नई दिल्ली । भारत में खेलों के प्रबंधन और खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल को मंजूरी दे दी है। इस कानून के लागू होने के बाद खेल संस्थाओं और महासंघों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना अनिवार्य हो जाएगा।
इस बिल का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देना, भ्रष्टाचार पर रोक लगाना और खेल संगठनों में पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। अब राष्ट्रीय खेल महासंघों और भारतीय ओलंपिक संघ जैसी संस्थाओं पर सरकार की गाइडलाइंस का पालन करना अनिवार्य होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत में खेल संस्कृति को मजबूती मिलेगी और खिलाड़ियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इससे खेल महासंघों में परिवारवाद और मनमानी पर भी रोक लगेगी।
बिल के तहत खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हें फैसलों में शामिल करने की व्यवस्था होगी। साथ ही, वित्तीय मामलों की ऑडिटिंग अनिवार्य कर दी गई है ताकि फंड का सही उपयोग हो सके।
खेल मंत्रालय ने इसे भारतीय खेलों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार बताया है। उम्मीद की जा रही है कि इससे भारत में खेलों का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और बेहतर होगा।
















